शहबाज शरीफ सरकार के कथित तौर पर इस्राइल से संबंध बनाने के सवाल पर पाकिस्तान में पहले से ही गर्म सियासी माहौल के और भड़क उठने के संकेत हैं। शरीफ सरकार के खिलाफ अभियान चला रहे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान इस पर अमेरिका का गुलाम होने के आरोप लगाते रहे हैं। ताजा खबर से इमरान खान की पार्टी- पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को वर्तमान सत्ताधारी गठबंधन को घेरने का एक और मौका मिल गया है।
पाकिस्तानियों के एक दल के इस्राइल आने की बात वहां के राष्ट्रपति आईजैक हर्जोग ने स्विट्जरलैंड के दावोस में पिछले हफ्ते बताई थी। उन्होंने बताया था कि इस दल में मुख्य रूप से अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। हर्जोग ने कहा कि इस दल से मिलना एक शानदार अनुभव रहा। हर्जोग दावोस में हुए वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान अब्राहम समझौते के बारे में चर्चा कर रहे थे। अमेरिकी मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने इस्राइल के आम संबंध कायम कर लिए थे।
पाकिस्तान ने अभी तक इस्राइल को एक संप्रभु देश के रूप में मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान की स्थापना के बाद से उसकी नीति दो-देश सिद्धांत का समर्थन करने की रही है। इस सिद्धांत के मुताबिक इस्राइल और फिलस्तीन दोनों को स्वतंत्र देश के रूप में रहने का मौका मिलना चाहिए। अब्राहम समझौता अगस्त 2020 में हुआ था। तब पाकिस्तान की तत्कालीन इमरान खान सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि उसका इस्राइल को मान्यता देने का कोई इरादा नहीं है। समझा जाता है कि पाकिस्तान में तीव्र इस्राइल विरोधी जन भावना है। इसलिए ताजा खबर से शहबाज शरीफ सरकार की मुसीबत और बढ़ सकती है।
वैसे शरीफ सरकार ने सफाई दी है कि इस्राइल के प्रति पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि देश की इस्राइल नीति पर आम सहमति है और उसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जिस यात्रा की खबर आई है, उसे एक विदेशी एनजीओ ने आयोजित किया था।