तसनीम असलम ने यह दावा भी किया कि शरीफ चाहते थे जब वह बतौर पीएम भारत जाएं तो वे वहां जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी हुर्रियत नेताओं से न मिलें। जबकि कोई पाक पीएम भारत जाने पर इन नेताओं से मिलता रहा है। लेकिन नवाज ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था।
बता दें कि 2014 में पहली बार नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ के वक्त नवाज शरीफ को आमंत्रण पर बुलाया था और वे भारत आए थे। प्रधानमंत्री मोदी भी अफगानिस्तान दौरे से लौटते वक्त नवाज शरीफ के कहने पर ही अचानक इस्लामाबाद पहुंचे थे।
डॉन अखबार ने लिखा है कि जब पूर्व राजनयिक के इन दावों पर पीएमएल-एन में सूचना सचिव मरियम औरंगजेब से जानकारी ली गई तो उन्होंने इन्हें बेबुनियाद बताया। उनका कहना था कि ये केवल उनकी सोच की उपज है इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मरियम का कहना था कि नवाज कश्मीर मसले को सुलझाने के करीब थे और ये सभी दस्तावेजों में दर्ज है।