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फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति जैक शिराक का 86 वर्ष की आयु में निधन

Thu, 26 Sep 2019 05:49 PM IST
Rohit Ojha वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति जैक शिराक (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
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फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति जैक शिराक का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके परिवार ने गुरुवार को यह जानकारी दी। वह 1995 से 2007 तक राष्ट्र प्रमुख रहे थे। वह मध्यमार्गी- दक्षिणपंथी राजनेता थे। शिराक के दामाद फ्रेडरिक सलात-बारौक्स ने मीडिया को बताया कि, पूर्व राष्ट्रपति शिराक ने आज सुबह अपने परिवार के बीच अंतिम सांस ली।

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शिराक दो बार फ्रांस के राष्ट्रपति बने थे। शिराक फ्रांस के प्रधानमंत्री भी रहे थे। उन्होंने फ्रांस में राष्ट्रपति का कार्यकाल सात साल से घटाकर पांच साल कर दिया था। वह 18 साल तक पेरिस के मेयर भी रहे। उनके पास प्रशासन का लंबा अनुभव था। शिराक कई तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों में भी घिरे रहे, इसके बावजूद उन्हें दोबारा राष्ट्रपति चुना गया। उनका उपनाम 'केमेलियन बोनापार्ट' था जिसका अर्थ गिरगिट होता है।

अपने 12 साल के कार्यालय के दौरान शिराक वैश्विक राजनयिक रहे, लेकिन आर्थिक सुधार करने और पुलिस तथा अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं के बीच तनाव को कम करने में नाकाम रहे। जिससे 2005 में फ्रांस में दंगे हुए। शिराक फ्रांस के ऐसे आखिरी नेता रहे जिनके जहन में द्वितीय विश्व युद्ध की यादें थीं। उन्होंने इस मिथक को भी तोड़ा कि फ्रांस को यहूदियों के नरसंहार और उन्हें भगाने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने इसमें फ्रांस की भूमिका को स्वीकार किया।
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शिराक ने 2003 में इराक पर अमेरिका की अगुवाई वाले हमले का विरोध किया था। इस वजह से फ्रांस के अपने शीर्ष सहयोगी के साथ रिश्तों में तनाव आ गया था। इसने अटलांटिक गठबंधन को कमजोर कर दिया था। बहरहाल, अमेरिका ने इराक पर हमला किया, बावजूद इसके शिराक को युद्ध आलोचकों से अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिला।

इसके अलावा, शिराक ने अन्य देशों से रिश्ते बेहतर करने के लिए राजनयिक के तौर पर काम किया और पश्चिम एशिया और अफ्रीकी देशों के साथ बेहतर रिश्ते बनाए। वह 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से मिलने वाले पहले राष्ट्र प्रमुख थे। अपने देश में उनपर पेरिस के मेयर रहने के दौरान, निधि का दुरुपयोग और रिश्वत लेने के आरोप लगे। साल 2007 में राष्ट्रपति पद से हटने के बाद उनको आधिकारिक तौर पर आरोपित किया गया। उन्हें 2011 में जनता के पैसे के दुरुपयोग, विश्वासघात, हितों के टकराव का दोषी पाया गया और दो साल के जेल की सजा दी गई।
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