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PM: प्रधानमंत्री मोदी के मुरीद हुए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई PM, कहा- उन्होंने खुद को सत्ता के अहंकार से बचाया हुआ है

Fri, 13 Mar 2026 09:39 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा

सार

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने भारत के रायसीना डायलॉग की जमकर तारीफ की है। उन्होंने पीएम मोदी को एक विनम्र और शक्तिशाली नेता बताया। एबॉट ने भारत को तानाशाही कहने वालों को करारा जवाब देते हुए कहा कि यहां का लोकतंत्र, मीडिया और न्यायपालिका पूरी तरह स्वतंत्र और मजबूत है।
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अस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट - फोटो : एक्स@HonTonyAbbott
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विस्तार
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ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने दिल्ली में होने वाले 'रायसीना डायलॉग' और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह कार्यक्रम साल 2016 से हर मार्च में आयोजित हो रहा है। यह एक सोच का शानदार नतीजा है। एबॉट ने इसकी तुलना दुनिया के अन्य बड़े मंचों से की। उन्होंने इसे स्विट्जरलैंड के दावोस और चीन के बोआओ फोरम से बेहतर बताया। उनके अनुसार, रायसीना डायलॉग में केवल अमीर लोगों का बोलबाला नहीं रहता और न ही यह सिर्फ सरकार की तारीफ करने का जरिया है। भारत का यह मंच पूरी तरह स्वतंत्र है।
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प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए एबॉट ने कहा, मोदी दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक हैं। इसके बावजूद उनमें दूसरों को सुनने का बड़ा गुण है। वे हर साल मुख्य अतिथि को सुनने के लिए कार्यक्रम में बैठते हैं, लेकिन खुद भाषण नहीं देते। पिछले साल उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री और इस साल फिनलैंड के राष्ट्रपति को पूरे धैर्य के साथ सुना। एबॉट ने कहा कि शायद एक हिंदू संन्यासी के रूप में बिताए समय की वजह से मोदी में सत्ता का अहंकार नहीं आया है। वे एक दशक से ज्यादा समय से सत्ता में हैं, फिर भी बहुत विनम्र हैं।

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भारत में तानाशाही के आरोपों पर एबॉट ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इन बातों को पूरी तरह बकवास बताया। उन्होंने कहा कि जिस देश में निष्पक्ष चुनाव होते हों और मीडिया व न्यायपालिका स्वतंत्र हो, वहां तानाशाही का कोई खतरा नहीं हो सकता। उन्होंने उदाहरण दिया कि रायसीना डायलॉग में इस्राइल और ईरान, दोनों के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिला। एबॉट खुद साल 2022 से इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी तानाशाह देश ऐसा खुला मंच तैयार नहीं कर सकता।

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