भारत और अमेरिका के रिश्तों के बीच एक दिन में दो बड़ी खुशखबरी सामने आई है। पहला अमेरिका ने पारस्परिक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया। इसी के साथ लंबे समय से अटके व्यापार समझौते पर भी सहमति बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद इसकी आधिकारिक घोषणा की। वॉशिंगटन के इस कदम के बाद पूर्व सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की प्रतिक्रिया सामने आई, जिन्होंने कहा कि यह समझौता घनिष्ठ आर्थिक संबंधों को और मजबूत करता है।
डोनाल्ड ट्रंप के पहले प्रशासन के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में प्रमुख भूमिका निभाने वाले पूर्व सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि मार्क लिंसकॉट ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और टैरिफ घटाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक रूप से करीब आने के प्रयासों को मजबूत करने में मदद करेगा।
'वे समझौते के करीब हैं, लेकिन फिर बातचीत रुक गई'
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मार्क लिंसकॉट ने कहा, 'मेरी पहली प्रतिक्रिया थी 'वाह! आखिरकार यह हो ही गया'। इसमें बहुत लंबा समय लग गया और मुझे खुशी है कि हमें समझौते की घोषणा सुनने को मिली है। लिंसकॉट ने कहा कि दोनों पक्षों के व्यापार वार्ताकार लंबे समय से एक समझौते की दिशा में काम कर रहे थे और पिछले साल जुलाई की शुरुआत में ऐसा लग रहा था कि वे समझौते के करीब हैं, लेकिन फिर बातचीत रुक गई।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस मामले पर सीधे बातचीत करने के बाद यह सफलता मिली। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के दृष्टिकोण 'अच्छी तरह से मेल खाते हैं'। व्यापार समझौता वास्तव में आर्थिक रूप से एक-दूसरे के करीब आने के उनके प्रयासों को मजबूत कर सकता है।
यह पहला चरण है, भी बहुत काम बाकी: मार्क लिंसकॉट
उन्होंने आगे कहा कि यह स्पष्ट हो गया कि समझौते के लिए दोनों नेताओं के बीच सीधी बातचीत की जरूरत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस मामले पर सीधे बातचीत करने के बाद यह सफलता मिली। दोनों नेताओं के दृष्टिकोण अच्छी तरह से मेल खाते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि यह समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह केवल एक शुरुआत है और इस सौदे पर अभी काम करना बाकी है। उन्होंने आगे कहा, 'यह पहला चरण है। यह पारस्परिक शुल्क, रूसी तेल शुल्क और कुछ प्राथमिकता वाले गैर-शुल्क अवरोधों पर एक अंतरिम समझौता है। अभी बहुत काम बाकी है।'
विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने जताई बड़ी उम्मीद
इधर, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर दक्षिण एशिया विश्लेषक माइकल कुगेलमैन की भी प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारतीय वस्तुओं के लिए एक प्रमुख निर्यात बाजार है, और टैरिफ कम करने से भारतीय निर्यातकों को मदद मिलेगी। भारत ने 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ के कारण होने वाले झटके से बचने के लिए कई उपाय खोजे हैं, जिनमें यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौता भी शामिल है।
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राजदूत सर्जियो गोर को बताई अहम कड़ी
विदेश नीति विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने अमेरिका-भारत संबंधों के भविष्य पर कहा कि हालांकि अंतरिक्ष, रक्षा और कानून प्रवर्तन जैसे क्षेत्रों में निरंतर सहयोग रहा है, लेकिन संबंध लड़खड़ा रहे थे। व्यापार समझौता दोनों पक्षों के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता है और यह अन्य मुद्दों को संबोधित करने के लिए गति प्रदान करेगा। उन्होंने दावा किया कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का नई दिल्ली आना इस समझौते को सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण रहा होगा, हालांकि उन्हें भारत में ज्यादा अनुभव नहीं था, वे अमेरिका-भारत साझेदारी के प्रबल समर्थक हैं और राष्ट्रपति के करीबी हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप आ सकते हैं भारत
वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर की अमेरिका यात्रा पर कुगेलमैन ने कहा कि यह अमेरिका-भारत संबंधों के लिए एक सकारात्मक पृष्ठभूमि प्रदान करता है। दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ताओं को अक्सर उनकी चुनौतियों के बारे में चेतावनियों के साथ तैयार किया गया। इस समझौते के साथ जयशंकर की यात्रा से पता चलता है कि संबंध उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जहां दोनों पक्ष इसे देखना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि यह व्यापार समझौता संभवतः संबंधों को स्थिर करेगा और क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए एक अवसर पैदा कर सकता है, जो स्थगित हो गया। यदि ऐसा होता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप बैठक के लिए भारत की यात्रा कर सकते हैं और इससे उन्हें व्यापार समझौते को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
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यह टिप्पणी ट्रंप के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने सोमवार को कहा था कि अमेरिका और भारत एक व्यापार समझौते पर सहमत हो गए हैं, जिसके तहत वाशिंगटन ने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति 'मित्रता और सम्मान' के कारण पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है।
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