फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एसआईआर के खिलाफ प्रदर्शनों का विदेशी कनेक्शन?: सिंघम की फंडिंग पर अमेरिकी जांच, रिपोर्ट में भारत का भी जिक्र

Wed, 21 Oct 2026 10:52 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, वॉशिंगटन

सार

भारत में एसआईआर के विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी रिपोर्ट में नेविल रॉय सिंघम से फंडिंग पाने वाले कुछ संगठनों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये संगठन विभिन्न देशों में प्रदर्शनों से जुड़े हैं। पढ़ें पूरी खबर
विज्ञापन
एसआईआर विरोध पर विदेशी संगठनों की नजर? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ एआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में मतदाता सूची को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को कुछ ऐसे समूहों और लोगों का समर्थन मिल रहा है, जो अमेरिकी टेक टाइकून नेविल रॉय सिंघम से मिलने वाली फंडिंग के कारण अब अमेरिकी कांग्रेस की जांच के दायरे में हैं। हालांकि, इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि वे इन विरोध-प्रदर्शनों को फंड देते हैं या इनका संचालन करते हैं।
विज्ञापन


रिपोर्ट में क्या बताया? 
मंगलवार को प्रकाशित 'फॉक्स न्यूज डिजिटल' की एक जांच रिपोर्ट में असरा क्यू. नोमानी ने बताया कि उन्होंने 'अमेरिका सहित 9 देशों में ऐसे 101 संगठनों की पहचान की है, जो यूरोप में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में समन्वय कर रहे हैं, उनका आयोजन कर रहे हैं या उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं।'

इस रिपोर्ट में भारत का जिक्र दो बार आया है। इसमें कहा गया है कि 'प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल' ने 16 अक्तूबर की एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को एक साथ रखा और यह सवाल उठाया कि ये 'नए विद्रोह' किस तरह संगठित राजनीतिक ताकत हासिल कर सकते हैं।
विज्ञापन


क्या है इंडियन अलायंस पेरिस? 
इसकी सूची में 'इंडियन अलायंस पेरिस -- इंटरनेशनल / डायस्पोरा' भी शामिल है। यह फ्रांस स्थित एक ऐसा संगठन है जो फ्रांस और भारत के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े संदेशों को आपस में जोड़ता है। इसने मैनहट्टन में 'पीपल्स फोरम' के साथ साझेदारी की है। रिपोर्ट में यह दावा नहीं किया गया है कि यह नेटवर्क भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को संचालित कर रहा है।

प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल ने क्या कहा? 
प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल ने भी दिल्ली से एक पोस्ट किया है। 12 अक्तूबर को एक्स पर उन्होंने लिखा, 'हम जंतर-मंतर के बैरिकेड्स से लिख रहे हैं, जहां भारत सरकार ने उन नागरिकों के खिलाफ सशस्त्र बलों को तैनात किया है जो बड़े पैमाने पर मताधिकार छीने जाने का विरोध कर रहे हैं और अपने वोट देने के अधिकार की रक्षा कर रहे हैं।'

ट्राइकॉन्टिनेंटल के प्रमुख ने क्या कहा? 
ट्राइकॉन्टिनेंटल के प्रमुख विजय प्रसाद ने 18 अक्तूबर की एक पोस्ट में इन शहरों का जिक्र करते हुए लिखा, 'पेरिस-नई दिल्ली-ब्यूनस आयर्स / इस घड़ी को गुस्से के नाम कर दो, क्योंकि गुस्सा ही ताकत बन सकता है।' ब्रेकथ्रू न्यूज ने 12, 13 और 16 अक्तूबर को भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को कवर किया। 13 अक्तूबर को उन्होंने बताया कि 'इस सप्ताहांत भारत में पुलिस का 'अभूतपूर्व और बेमिसाल' दमन देखने को मिला।'

फॉक्स ने कहा कि 'ब्रेकथ्रू न्यूज', 'कोडपिंक' और 'पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन' को 'शंघाई में रहने वाले, अमेरिका में जन्मे टेक टाइकून नेविल रॉय सिंघम से फंडिंग और समर्थन मिलता है।' जुलाई 2026 में, जेसन स्मिथ की अध्यक्षता वाली 'हाउस वेज एंड मीन्स कमिटी' ने 'ब्रेकथ्रू न्यूज', प्रशांत के 'ट्राइकॉन्टिनेंटल' और 'पीपल्स फोरम' को समन जारी किया। स्मिथ उस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे, जिसने इस हफ्ते मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी।

'न्यूयॉर्क पोस्ट' और 'सीबीएस न्यूज' ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से बताया है कि मैनहट्टन में एक फेडरल ग्रैंड ज्यूरी सिंघम के खिलाफ जांच कर रही है। अभी तक कोई आरोप तय नहीं किए गए हैं और न्याय विभाग ने भी इस जांच की पुष्टि नहीं की है। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' ने सबसे पहले 2023 में सिंघम के फंडिंग नेटवर्क के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। 
विज्ञापन




 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें