संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि जो वैश्विक शक्तियां खुद अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं। वे ही सुरक्षा परिषद में बैठी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि 15 देशों वाले इस वैश्विक संगठन में सुधार सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
महासचिव गुटेरेस ने सत्ता के पुनर्वितरण की जरूरत पर भी जोर दिया। गुटेरेस ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, 'साफ बात यह है कि हमारे बीच भू-राजनीतिक मतभेद हैं। इन मतभेदों के बीच ऐसी ताकतें हैं जो खुद अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करती हैं और सुरक्षा परिषद में शामिल हैं। जैसा कि हम जानते हैं, इसी वजह से सुरक्षा परिषद ठप पड़ी है। यही कारण है कि सुरक्षा परिषद में सुधार को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऐसी सुरक्षा परिषद को स्वीकार नहीं किया जा सकता जिसका स्वरूप आज की दुनिया के बजाय कई दशक पुरानी दुनिया को दर्शाता हो।'
पैरालिसिस से किया तुलना
यूएन प्रमुख ने यूएम जनरल असेंबली के 81वें सेशन के हाई-लेवल वीक की शुरुआत से पहले वर्ल्ड हेडक्वार्टर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, 'और यह एक तरह का 'पैरालिसिस' (ठहराव या बेअसर होने की स्थिति) है।' गुटेरेस ने कहा कि यूएन सुरक्षा परिषद के ठप पड़ने से ऐसी स्थिति बन गई है कि दुनिया भर के हर देश को लगता है कि उन्हें अपनी मर्जी का कुछ भी करने का हक है।' क्योंकि सबसे बड़ी ताकतों का उदाहरण अच्छा नहीं है। वे जानते हैं कि वे बिना किसी सजा के ऐसा कर सकते हैं क्योंकि सिक्योरिटी काउंसिल खुद बेअसर हो चुकी है।
उन्होंने कहा, 'बिना किसी सजा के बच निकलने की इसी छूट ने ऐसा माहौल बना दिया है जिसमें हम देख रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा देश अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं, और वे ऐसा बिना किसी डर या सजा के कर रहे हैं। एक बात साफ है। यह मामला असल में ताकत का है। बात यह है कि हमारी दुनिया में ताकत का बंटवारा और उसका इस्तेमाल जिस तरह से होता है, उसकी वजह से बहुपक्षीय संस्थाएं असरदार ढंग से काम नहीं कर पातीं।'
ब्रिक्स को लेकर क्या बोले?
एक और सवाल के जवाब में कि क्या वह ब्रिक्स जैसे संगठनों को पावर शिफ्ट (सत्ता के बदलाव) को दिखाने के मामले में मौजूदा व्यवस्था के पूरक या विकल्प के तौर पर देखते हैं। गुटेरेस ने कहा कि आज की संस्थाएं कई दशक पहले के पावर रिलेशन (सत्ता के संबंधों) को दिखाती हैं, जिनमें से ज्यादातर दूसरे विश्व युद्ध के समय बनी थीं। लेकिन दुनिया बदल रही है, और हम नई ताकतों का उदय देख रहे हैं। और आज, अगर ग्लोबल इकॉनमी (वैश्विक अर्थव्यवस्था) को देखें, तो हर दिन ग्लोबल जीडीपी में विकसित देशों का हिस्सा थोड़ा कम हो रहा है। हर दिन ग्लोबल जीडीपी में उभरती अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा थोड़ा बढ़ रहा है।'
बता दें कि एक हफ्ते तक चलने वाली आम बहस, जिसमें दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार के प्रमुख, विदेश मंत्री, नेता और दूत यूएन मुख्यालय में इकट्ठा होंगे। यह 22 सितंबर को शुरू होगी। इस दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा हॉल में मशहूर हरे पोडियम से विश्व नेताओं को संबोधित करेंगे। गुटेरेस के लिए यह संयुक्त राष्ट्र महासभा का आखिरी हाई-लेवल हफ्ता होगा, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख के तौर पर उनका दूसरा पांच साल का कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है।
राजनयिक के तौर पर बीते 10 वर्षों में क्या सीखा?
जब उनसे पूछा गया कि दुनिया के सबसे बड़े राजनयिक के तौर पर बीते 10 वर्षों से उन्होंने क्या सबक सीखा है, तो गुटेरेस ने कहा, 'मैंने यह सबक सीखा है कि जब दुनिया तेजी से मल्टीपोलर (कई ध्रुवों वाली) होती जा रही है, तो मल्टीलेटरल (बहुपक्षीय) संस्थाओं में सुधार करना जरूरी है। ऐसा इसलिए ताकि वे संस्थाएं शांति, विकास और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के मामले में असरदार बन सकें, क्योंकि ये तीनों ही यूएन के मुख्य आधार हैं।