गाजा के अल-शिफा अस्पताल के बाहर प्रेस के लिए लगे कैंप को निशाना बनाकर इस्राइल ने हमला किया। इस हमले में अल-जजीरा के संवाददाता अनस अल-शरीफ, मोहम्मद करीकेह, कैमरामैन इब्राहिम जहीर, मोअमेन अलीवा और मोहम्मद नौफल की मौत हो गई। हमले के बाद इस्राइली सेना ने एक बयान में कहा कि अनस अल-शरीफ हमास के आतंकी थे।
गाजा पर इस्राइल ने एक बार फिर हमले किए। इन हमलों में अल-जजीरा के पांच पत्रकारों की मौत हो गई। इस्राइली सेना ने एक पत्रकार अनस अल शरीफ को हमास का आतंकी करार दिया है। वहीं इस्राइल के इस कदम की पत्रकारों की सुरक्षा समिति ने निंदा की है।
विज्ञापन
गाजा के अल-शिफा अस्पताल के बाहर प्रेस के लिए लगे कैंप को निशाना बनाकर इस्राइल ने हमला किया। इस हमले में अल-जजीरा के संवाददाता अनस अल-शरीफ, मोहम्मद करीकेह, कैमरामैन इब्राहिम जहीर, मोअमेन अलीवा और मोहम्मद नौफल की मौत हो गई। हमले के बाद इस्राइली सेना ने एक बयान में कहा कि अनस अल-शरीफ हमास के आतंकी थे। हमास में एक आतंकी सेल के प्रमुख के रूप में काम कर चुका था।
वहीं हमले से पहले अल जजीरा के संवाददाता ने एक्स पर गाजा में इस्राइली हमलों की सूचना दी थी। उन्होंने अपने आखिरी पोस्ट में लिखा था कि यदि मेरे ये शब्द आप तक पहुंचें तो जान लीजिए कि इस्राइल मुझे मारने और मेरी आवाज को दबाने में सफल हो गया है। बताया जा रहा है कि गाजा में इस्राइली हमलों में अब तक 200 मीडियाकर्मी मारे जा चुके हैं।
विज्ञापन
गाजा में काफी सक्रिय थे अनस: अल-जजीरा
पत्रकारों के कैंप पर हुए हमले की सूचना देते हुए अल-जजीरा ने कहा कि हमले में पत्रकार अनस अल-शरीफ अपने चार साथियों के साथ मारे गए। अपने साथियों की मौत की सूचना देते वक्त अल-जजीरा के एंकर भावुक हो गए। अल-जजीरा के मुताबिक अल-शरीफ गाजा में जमीनी स्तर पर काम कर रहे थे। वह गाजा के हालात के बारे में रोज रिपोर्ट देते थे।
इस्राइली सेना का बयान
इस्राइली सेना ने कहा कि उसने अल-जजीरा के अल शरीफ पर हमला किया है। वह हमास से जुड़ा आतंकी था और पत्रकार के तौर पर काम रहा था। वह इस्राइली नागरिकों और आईडीएफ के सैनिकों के खिलाफ रॉकेट हमलों को आगे बढ़ाने में शामिल था।
सुरक्षा की उठाई गई थी मांग
पिछले महीने पत्रकारों की एक समिति ने अनस अल-शरीफ की सुरक्षा की मांग की थी। समिति ने कहा था कि इस्राइली सेना के अरबी प्रवक्ता ने अनस अल-शरीफ पर ऑनलाइन हमले तेज कर दिए हैं। सीपीजे ने कहा कि पत्रकारों की मौत का मामला हैरान करने वाला हैं। सीपीजे की क्षेत्रीय निदेशक सारा कुदाह ने कहा कि सबूत दिए बिना पत्रकारों को आतंकी करार देने की इस्राइल की प्रवृत्ति, प्रेस की स्वतंत्रता के प्रति उसके इरादे और सम्मान पर गंभीर सवाल उठाती है। पत्रकार नागरिक हैं और उन्हें कभी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। इन हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। फलस्तीन पत्रकार सिडिंकेट ने इस हमले को खूनी अपराध करार दिया।