मजबूत शरीर का मतलब जरूरी नहीं कि दुबला शरीर हो
फिटनेस पत्रकार मिकाला जैमिसन का कहना है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग महिलाओं के लिए अपने शरीर और व्यायाम के साथ बेहतर रिश्ता बनाने का जरिया हो सकती है। लेकिन उन्हें इस बात की चिंता भी है कि स्ट्रॉन्ग इज द न्यू स्किनी यानी दुबलेपन की जगह मजबूती को नया आदर्श बनाने का नारा कहीं एक और सीमित सौंदर्य मानक न बन जाए।सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसी महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो दिखाई देते हैं, जिनका शरीर दुबला होने के साथ मांसल भी होता है। इससे यह धारणा बन सकती है कि मजबूत होने का मतलब एक खास तरह का शरीर हासिल करना है। जबकि वास्तविकता यह है कि अलग-अलग आकार और बनावट वाले शरीर भी मजबूत हो सकते हैं।न्यूयॉर्क स्थित फॉर्म फिटनेस ब्रुकलिन की प्रमाणित पर्सनल ट्रेनर केरी हार्वे के मुताबिक मांसपेशियां बढ़ने पर शरीर के आकार में बदलाव आ सकता है। बाजुओं, पीठ और कंधों की मांसपेशियां विकसित होने पर कपड़ों की फिटिंग भी बदल सकती है। यह बदलाव अपने आप में खराब नहीं है। समस्या तब होती है, जब कोई व्यक्ति शरीर में होने वाले हर बदलाव को पुराने सौंदर्य मानकों के आधार पर परखने लगता है।
मांसपेशियां बनाने के लिए भोजन भी जरूरी
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ पर्याप्त भोजन लेना भी उतना ही जरूरी है। मांसपेशियों को विकसित होने और शरीर को व्यायाम से उबरने के लिए ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। केवल वजन उठाना और साथ में भोजन सीमित कर देना शरीर पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।पोषण विशेषज्ञ मेगन हेलनर के मुताबिक, मांसपेशियां बनाने और उन्हें बनाए रखने के लिए पर्याप्त ऊर्जा की जरूरत होती है। भोजन को केवल व्यायाम के नतीजे बेहतर करने के साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए। शरीर को सामान्य रूप से काम करने, हार्मोन बनाने, अंगों के कार्य और रोजमर्रा की गतिविधियों के लिए भी ऊर्जा चाहिए।इसलिए फिटनेस के नाम पर भोजन के प्रति कठोर नियम बनाना या जरूरी खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना सही तरीका नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम एक-दूसरे के पूरक हैं।
कब व्यायाम का जुनून बन सकता है नुकसान की वजह?
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के फायदे तभी मिलते हैं, जब शरीर को पर्याप्त आराम भी दिया जाए। लगातार भारी वजन उठाना, दर्द या चोट के बावजूद व्यायाम जारी रखना और आराम के दिन लेने पर बेचैनी महसूस करना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक मांसपेशियों को व्यायाम के बाद उबरने का समय देना जरूरी है। हर दिन अधिक वजन उठाना या लगातार अपनी क्षमता बढ़ाने की कोशिश करना जरूरी नहीं कि बेहतर परिणाम दे। जरूरत से ज्यादा प्रशिक्षण और अपर्याप्त भोजन से थकान, चोट और शरीर की ऊर्जा जरूरतों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।हार्वे का कहना है कि व्यायाम का उद्देश्य रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाना होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति इतना अधिक प्रशिक्षण करने लगे कि उसे हर समय लगता रहे कि वह पर्याप्त मेहनत नहीं कर रहा है, तो व्यायाम से मिलने वाला आनंद खत्म हो सकता है।
फिटनेस का लक्ष्य शरीर की बनावट नहीं, बेहतर जिंदगी हो
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग शुरू करने के लिए हर किसी को भारी वजन उठाने या किसी प्रतियोगिता की तैयारी करने की जरूरत नहीं है। अपनी उम्र, स्वास्थ्य, शारीरिक क्षमता और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार व्यायाम का तरीका चुनना अधिक उपयोगी है। शुरुआत हल्के वजन और सही तकनीक से की जा सकती है। जरूरत के अनुसार प्रशिक्षक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना भी मददगार हो सकता है।फिटनेस का आकलन केवल तराजू पर दिखने वाले वजन, मांसपेशियों के आकार या सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीरों से नहीं किया जाना चाहिए। बेहतर संकेत यह हैं कि व्यक्ति पहले से अधिक सहजता से चल पा रहा है या नहीं, रोजमर्रा के काम आसानी से कर पा रहा है या नहीं और उसकी शारीरिक क्षमता में सुधार हो रहा है या नहीं।मजबूत बनने की कोशिश महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक बना सकती है। लेकिन इसका उद्देश्य किसी तयशुदा शरीर को हासिल करना नहीं होना चाहिए। असली फायदा तब है, जब व्यायाम श