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बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत श्रीलंका को देगा 105 करोड़ रुपये की सहायता: विदेश मंत्रालय

Sat, 26 Sep 2020 10:42 AM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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संयुक्त सचिव अमित नारंग - फोटो : ANI
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भारत और श्रीलंका के बीच हुए आभासी सम्मेलन को लेकर विदेश मंत्रालय ने बताया है कि वर्तमान में कोरोना के चलते लगाए गए प्रतिबंधों में, आभासी शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने पर नेताओं की प्रतिबद्धता के उच्च स्तर को दर्शाता है।

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विदेश मंत्रालय के हिंद महासागर क्षेत्र प्रभाग के संयुक्त सचिव अमित नारंग ने कहा, भारत-श्रीलंका आभासी द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान, आज हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए लगभग 105 करोड़ रुपये (15 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की सहायता की घोषणा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में कुशीनगर की पहली उद्घाटन उड़ान में भारत श्रीलंका के बौद्ध तीर्थ यात्रियों के प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को सुविधा प्रदान करेगा।  
 


मंत्रालय ने कहा, भारत और श्रीलंका द्विपक्षीय वित्तीय सहयोग को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। भारत ने आर्थिक सुधार में सहायता करने और कोरोना संबंधित विवादों से निपटने के लिए श्रीलंका के सेंट्रल बैंक में 400 मिलियन डॉलर की मुद्रा विनिमय सुविधा का विस्तार किया है। 
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विदेश मंत्रालय ने कहा, श्रीलंका के पीएम महिंदा राजपक्षे ने भारतीय सहायता से निर्मित एक प्रतिष्ठित परियोजना जाफना सांस्कृतिक केंद्र का विशेष उल्लेख किया। केंद्र लगभग तैयार है और पीएम राजपक्षे ने परियोजना का उद्घाटन करने के लिए पीएम मोदी को निमंत्रण दिया है। 

मंत्रालय ने कहा, पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि कुछ उत्पादों के आयात पर श्रीलंकाई पक्ष द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंधों में जल्द ही ढील दी जाएगी क्योंकि इससे श्रीलंका की अर्थव्यवस्था और आम लोगों को भी फायदा होगा।  

संयुक्त सचिव अमित नारंग ने कहा, मोदी और राजपक्षे ने रक्षा सहयोग की मजबूती पर संतोष व्यक्त किया। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर सहमत हुए। उन्होंने कहा, ऋण अदायगी के लिए श्रीलंका के अनुरोध पर तकनीकी चर्चा चल रही है। 

नारंग ने बताया, मछुआरों के मुद्दे पर, मोदी और राजपक्षे रचनात्मक और मानवीय दृष्टिकोण को जारी रखने और मजबूत करने पर सहमत हुए। राजपक्षे के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने तमिल सुलह मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए श्रीलंका के संविधान के 13वें संशोधन को लागू करने पर जोर दिया। 

संयुक्त सचिव ने कहा, पीएम मोदी ने श्रीलंका में नई सरकार से समानता, न्याय, शांति, सम्मान के लिए तमिलों की उम्मीदों को साकार करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि वार्ता के परिणामों से संबंधों को गहरा करने के लिए एक महत्वाकांक्षी एजेंडा स्थापित करने में मदद मिलेगी।  

इससे पहले, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके श्रीलंकाई समकक्ष महिंदा राजपक्षे आज द्विपक्षीय वार्ता की। अधिकारियों ने बताया कि इस वार्ता में हिंद महासागर में मछली पकड़ने का मुद्दा एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। गौरतलब है कि भारत और श्रीलंका की नौसेना द्वारा एक-दूसरे के मछुआरे को पकड़ा जाता रहा है। 

वहीं, राजपक्षे के मीडिया कार्यालय ने शनिवार को कहा था कि प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को स्थानीय मछली पकड़ने वाले संगठनों के एक बड़े दल के साथ बातचीत की और दोनों देशों के बीच यह मुद्दा चर्चा का प्रमुख बिंदु होगा। 

राजपक्षे के कार्यालय ने बताया कि मछुआरा समुदाय ने देश के प्रमुख को बताया है कि कोरोना के प्रकोप के बाद से भारतीय अधिकारी अब अवैध शिकार करने वाले अपने मछुआरों को रोक नहीं रहे हैं। इससे स्थानीय मछली पकड़ने वाले समुदाय के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। 

यह भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों पर पांच वर्ष में 517 करोड़ खर्च, पांच बार गए अमेरिका-रूस और चीन

श्रीलंकाई हिस्से में भारतीयों द्वारा मछली पकड़ना हमेशा से ही एक समस्या रही है और पिछले दिनों इसे लेकर दोनों पड़ोसी देशों के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता भी हुई। राजपक्षे ने उन्हें आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को भारतीय प्रधानमंत्री के साथ उठाया जाएगा और श्रीलंकाई नौसेना को देश के जल में अवैध शिकार करने वाले किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करना चाहिए। 
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श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत में राजनीतिक, आर्थिक, वित्त, विकास, रक्षा और सुरक्षा क्षेत्रों, शैक्षिक, पर्यटन और सांस्कृतिक के साथ-साथ आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पूर्ण ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है।

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