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इस्राइल-यूएई के बीच शुरू हुई पहली वाणिज्यिक उड़ान सेवा, अमेरिकी-इस्राइली प्रतिनिधि मंडल ने भरी उड़ान

Mon, 31 Aug 2020 03:07 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
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Benjamin Netanyahu and Prince Mohammed Al Nahyan - फोटो : social media
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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और इस्राइल के बीच हुए शांति समझौते के बाद सोमवार को एक अमेरिकी-इस्राइली प्रतिनिधि मंडल ने दोनों देशों के बीच पहली वाणिज्यिक उड़ान के जरिए तेल अवीव से आबू धाबी के लिए उड़ान भरी। इन दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करवाने में अमेरिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

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तेल अवीव के बेन गुरीएन हवाई अड्डे से ईआई एआई फ्लाइट द्वारा प्रतिनिधि मंडल ने स्थानीय समयानुसार 7.30 बजे आबू धाबी के लिए उड़ान भरी। अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और व्हाइट हाउस सलाहकार जेरेड कुशनर कर रहे हैं। विमान के कॉकपिट में अरबी, अंग्रेजी और हिब्रो में 'शांति' लिखा गया है। 


इस्राइल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच रिश्तों को सामान्य करने के लिए इस समझौते का एलान 13 अगस्त को किया गया था। इस तरह यूएई खाड़ी देशों का पहला देश और अरब देशों का तीसरा ऐसा देश बना जिसने इस्राइल के साथ अपने रिश्तों को सामान्य किया। 
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इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मीर बेन शबात यहूदी देश की ओर से इस उड़ान के जरिए आबू धाबी पहुंचने वाले सबसे वरिष्ठ व्यक्ति होंगे। आबू धाबी में निर्धारित वार्ता उड्डयन, पर्यटन, व्यापार, स्वास्थ्य, ऊर्जा और सुरक्षा सहित क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से है।

इस्राइल के राष्ट्रीय वाहक द्वारा इस उड़ान को सऊदी अरब के हवाई अंतरिक्ष को पार करने की अनुमति मिलने की सूचना मिली है। हालांकि, इस्राइल एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों ने इन रिपोर्टों की पुष्टि नहीं की है।  

एफ-35 मिलने का रास्ता साफ
शांति समझौते से यूएई को अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-35 मिलने का रास्ता साफ हो गया है। अब तक इस्राइल यूएई को एफ-35 बेचने के खिलाफ था। यूएई को बिना रुकावट अमेरिका से अब कई और हथियार भी मिल सकेंगे। 

फिलिस्तीनी समूहों ने की निंदा 
दोनों ही देशों के बीच हुए शांति समझौते से यूएई की किताबों से 1972 का कानून औपचारिक रूप से खत्म हो गया है। दरअसल, इस कानून के तरह अरब देशों द्वारा व्यापक रूप से रखे गए रुख को प्रतिबिंबित किया गया था, जिसमें कहा गया था कि इस्राइल को मान्यता तब ही दी जाएगी, जब फिलिस्तीनियों का अपना स्वतंत्र राज्य होगा।

फिलिस्तीनी समूहों द्वारा घोषणा किए जाने के बाद यूएई-इस्राइल समझौते की आलोचना की गई। इन समूहों ने कहा कि यह फिलिस्तीनी मुद्दों को लेकर नहीं किया गया है, इसमें फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों की अनदेखी की गई है।  

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