वैश्विक वित्तीय निगरानी संस्था एएफटीए ने आतंकवाद और आतंकवादी वित्तपोषण से जुड़े वित्तीय प्रतिबंधों के नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत मानवीय सहायता, राहत सामग्री और बुनियादी जरूरतों की आपूर्ति पर प्रतिबंधों का असर नहीं पड़ेगा। एएफटीए का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और जरूरतमंदों तक सहायता पहुंचाने, दोनों उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
वैश्विक वित्तीय निगरानी संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने आतंकवाद और आतंकवादी वित्तपोषण से जुड़े वित्तीय प्रतिबंधों के नियमों में बदलाव किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिबंधों की वजह से जरूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचने में कोई बाधा न आए। एफएटीएफ ने अपने रिकमेंडेशन-छह को अपडेट किया है। यह नियम देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के आतंकवाद और आतंकवादी वित्तपोषण रोकने संबंधी प्रस्तावों के तहत वित्तीय प्रतिबंध लागू करने के लिए कहता है।
मानवीय छूट का करना होगा पालन
नए बदलावों के तहत देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2664, 2761 और 2615 में शामिल मानवीय छूट का पालन करना होगा। इससे राहत एजेंसियां और मानवीय संगठन जरूरतमंद लोगों तक धन, संसाधन, सामान और सेवाएं पहुंचा सकेंगे। एफएटीएफ ने कहा कि इन संशोधनों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रहे, लेकिन इसके कारण मानवीय सहायता और लोगों की बुनियादी जरूरतों की आपूर्ति प्रभावित न हो।
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सामूहिक सुरक्षा के लिए जरूरी फैसला- मद्राजो
एफएटीएफ की अध्यक्ष एलिसा डे अंडा मद्राजो ने कहा कि आतंकवाद और उसके वित्तपोषण के खिलाफ कदम सामूहिक सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। हालांकि, इन उपायों का उद्देश्य मानवीय सहायता पहुंचाने में बाधा पैदा करना नहीं है। इसलिए दोनों लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
बदलाव की वजह धनशोधन समेत आतंक वित्तपोषण
एफएटीएफ के अनुसार, यह बदलाव धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ नियमों के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले अनचाहे प्रभावों को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। संस्था जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर वित्तीय अपराधों से लड़ने पर भी जोर दे रही है।