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FIFA World Cup 2022: कतर ने की शानदार मेजबानी, लेकिन एशियाई फुटबॉल को क्या हुआ हासिल?

Mon, 19 Dec 2022 03:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल

सार

FIFA World Cup 2022: खेल विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में जापान और दक्षिण कोरिया किस रूप में अपने फुटबॉल का विकास करते हैं, उस पर पूरे एशिया की निगाहे टिकी रहेंगी। कतर ने शानदार मेजबानी की मिसाल कायम की...
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FIFA World Cup 2022 - फोटो : FIFA/वेबसाइट
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विस्तार
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एशिया की जमीन पर दूसरी बार हुए फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup 2022) में एशिया का अब तक का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन रहा। इस बार कुल तीन टीमें प्री-क्वार्टर फाइनल (यानी आखिर 16 टीमों) में पहुंचीं। जापान ने अपने शुरुआती प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा। इससे इसके और भी आगे जाने की उम्मीदें जगी थीं। लेकिन प्री-क्वार्टर फाइनल में उसकी यात्रा ठहर गई। इसके बावजूद एशिया में यह उम्मीद मजबूत हुई है कि आने वाले समय मे एशियाई टीमें फुटबॉल में अपनी ज्यादा प्रभावशाली छाप छोड़ेंगी।

ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉल टीम के कोच ग्राम ऑर्नाल्ड ने कहा है- ‘मेरी राय में एशियाई टीमें मजबूत हो रही हैं। खास कर पश्चिम एशियाई टीमें बेहतर हो रही हैं। वैसे दक्षिण कोरिया और जापान ने भी अपनी स्थिति मजबूत की है।’ ऑस्ट्रेलिया 2006 में एशियन फुटबॉल एसोसिएशन का सदस्य बन गया था। फीफा के नियमों के तहत किसी दूसरे महाद्वीप की टीम को भी किसी अन्य महाद्वीप के एसोसिएशन की सदस्यता लेने का अवसर दिया जाता है।

ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इस बार डेनमार्क को हरा कर सबको चौंकाया। इसके साथ ही वह भी दूसरे दौर यानी प्री क्वार्टर फाइनल में पहुंची। एशियाई टीमों के बीच सबसे खराब प्रदर्शन मेजबान कतर का रहा, जो ग्रुप स्टेज में अपने तीनों मैच हार गई। इस तरह वह पहले दौर में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई। हालांकि ईरान और सऊदी अरब भी दूसरे दौर में नहीं जा सके, लेकिन दोनों ने ग्रुप स्टेज में बेहतर खेल दिखाया। सऊदी अरब ने तो अपने पहले ही मैच में अर्जेंटीना को हरा दिया, जो आखिरकार टूर्नामेंट का चैंपियन बना।

परंपरागत रूप से जापान और दक्षिण कोरिया एशिया की सबसे मजबूत टीमें रही हैं। दक्षिण कोरिया ने 11 मौकों पर वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया है। उनमें से तीन बार वह दूसरे दौर में पहुंची है। एक समय दक्षिण कोरिया का अंदरूनी फुटबॉल ढांचा पूरे एशिया में मॉडल समझा जाता था। लेकिन अब वह जापान के मॉडल का पालन कर रहा है। इसके तहत युवा विकास, प्रोफेशनल लीग सिस्टम, और अधिक से अधिक खिलाड़ियों को यूरोपीय लीग में खेलने के लिए भेजने पर जोर दिया जा रहा है। दक्षिण कोरियाई टीम में मिडफील्डर की भूमिका में खेलने वाले हवांग इन बियोम ने कहा है- ‘हालांकि दोनों टीमें दूसरे दौर तक ही पहुंच पाईं, लेकिन जापान और दक्षिण कोरिया के माहौल में फर्क है। यूरोप में आप जहां भी जाएंगे, वहां आपको जापानी खिलाड़ी नजर आएंगे।’

जापान ने ग्रुप स्तर पर कतर में दो चौंकाने वाले नतीजे दिए। उसने दो पूर्व वर्ल्ड चैंपियन टीमों- जर्मनी और स्पेन को हराया। इस तरह ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ कहे जाने वाले समूह से वह निकल कर दूसरे दौर में जाने में कामयाब रहा। दूसरे दौर में क्रोएशिया से लीड लेने के बावजूद आखिरकार जापानी टीम हार गई। लेकिन इससे एशिया की सबसे मजबूत टीम होने की अपनी पहचान की उसने एक बार फिर पुष्टि की।

खेल विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में जापान और दक्षिण कोरिया किस रूप में अपने फुटबॉल का विकास करते हैं, उस पर पूरे एशिया की निगाहे टिकी रहेंगी। कतर ने शानदार मेजबानी की मिसाल कायम की। 2002 में जापान और दक्षिण कोरिया ने साझा तौर पर फुटबॉल वर्ल्ड कप की मेजबानी की थी। तब पहली बार ये टूर्नामेंट एशिया में हुआ था। अब दूसरी बार एशिया को यह गौरव मिला। लेकिन सामने यही आया कि एशियाई टीमें यूरोप और लैटिन अमेरिकी टीमों के मुकाबले अब भी पीछे ही हैं।

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