अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करने वाली संस्था फाइनेंशल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) के प्रमुख मार्शल बिलिंगस्लिया ने पैरिस में हुई बैठक के बाद पाकिस्तान को काली सूची में डालने की संभावना का संकेत दिया है। बिलिंगस्लिया ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "पाकिस्तान को 2018 में सम्मत हुई कार्य योजना पर महत्वपूर्ण काम करना था। वो लगभग हर तरह से पीछे रहा है।"
उन्होंने कहा, "पाकिस्तान को फरवरी में चेतावनी दी गई थी कि वह जवनरी की समय सीमा के साथ अपनी कार्य योजना को पूरा करने में विफल रहा है। उससे (पाकिस्तान) से आग्रह किया गया था कि मई तक कार्य योजना को पूरा करे। लेकिन दुर्भाग्य से वह मई में भी अपनी कार्य योजना को पूरा करने में विफल रहा।"
आतंकवाद को खत्म करने के लिए पाकिस्तान 26 सूत्री कार्यक्रम को पूरा करने में सफल नहीं हो पाया है, जिसके चलते एफएटीएफ ने उसपर सख्ती बरती है।
बिलिंगस्लिया का कहना है कि अगर पाकिस्तान कार्य योजना को पूरा करने में विफल होता है, तो एफएटीएफ कार्रवाई के अगले कदम पर विचार करेगा। पाकिस्तान अभी काफी पीछे है और इस साल सितंबर तक उसे बहुत कुछ करना बाकी है। उनका कहना है, "अब कार्य योजना सितंबर तक पूरी करनी है। ये वो जगह (एफएटीएफ की हाल ही में हुई बैठक) नहीं थी जहां हमने काली सूची पर चर्चा की। यह वह जगह (बैठक में) थी जहां हमने जांच की कि पाकिस्तान अपनी कार्य योजना से कितना पीछे है... मुझे ये कहना पड़ेगा कि वह काफी पीछे है।"
क्या है एफएटीएफ?
एफएटीएफ एक अंतर्राज्यीय निकाय है, जो धन शोधन तथा आतंकवादी वित्तीयन का सामना करने के लिए मानक निर्धरित करता है। इसकी स्थापना 1989 में हुई थी। इसकी बैठक में समीक्षा की जाती है कि संबंधित देश मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराने से रोकने में कितनी प्रगति कर रहा है। ये संस्था पेरिस से संचालित होती है।
23 जून को ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा ने कहा था कि पाकिस्तान बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और अपनी धरती से आतंकवाद को खत्म करने के लिए सभी उपलब्ध स्रोतों का इस्तेमाल कर रहा है। इस्लामाबाद स्थायी शांति और स्थिरता प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
लंदन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज में बाजवा ने कहा था, "हम अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे हैं, शांति और समृद्धि के दुश्मनों को खत्म करने के लिए सभी जरूरी स्त्रोंतो का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन यह तथ्य है कि दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता इस क्षेत्र में संघर्ष और विवाद के समाधान पर निर्भर है।"
बता दें पाकिस्तान फिलहाल ग्रे लिस्ट वाले देशों की सूची में है। ग्रे लिस्ट में बने रहने से पाकिस्तान को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इस लिस्ट में जिस देश को रखा जाता है, उसे कर्ज देने में बड़ा जोखिम माना जाता है। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत खराब है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं ने भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद और कर्ज देने में कटौती की है। पाकिस्तान इस कार्य योजना को जनवरी और मई 2019 की दो डेडलाइन में भी पूरा नहीं कर पाया है।