पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)
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पेरिस स्थित वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) द्वारा बनाए गए सख्त नियमों से जुड़े दो विधेयकों को पाकिस्तान के विपक्षी बहुल सीनेट (104 सदस्यीय) ने ठुकरा दिया है। इस कारण पाकिस्तान सरकार द्वारा मनी लांड्रिंग मामले और आतंकियों के वित्तपोषण निगरानी समूह द्वारा ब्लैकलिस्टेड किए जाने से बचाव के लिए किए जा रहे प्रयासों पर पानी फिर गया है।
सीनेट द्वारा खारिज दो विधेयकों में एंटी-मनी लांड्रिंग (दूसरा संशोधन) और इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी वक्फ संपत्ति बिल शामिल है। ये विधेयक पाकिस्तान के एफएटीएफ की ग्रे सूची से बचने के प्रयासों का हिस्सा थे। सीनेट के इस कदम पर प्रधानमंत्री इमरान खान ने तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे विपक्षी नेताओं के अपने अवैध धन को बचाने की कोशिश बताया और विपक्ष पर आरोप लगाए।
इससे पहले जुलाई में पाकिस्तान की सीनेट ने एफएटीएफ द्वारा तय की गई सख्त शर्तों से संबंधित दो विधेयकों को को सर्वसम्मति से पारित कर दिया था। इससे एक दिन पहले ही इन विधेयकों को नेशनल असम्बेली में विपक्ष के विरोध के बावजूद पारित करा लिया गया था। बता दें कि जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे सूची में डाल दिया गया था और सही कार्रवाई न करने पर उसे काली सूची में भी डाले जाने का अंदेशा है।
आतंक को बढ़ावा देने वालों पर लगता भारी जुर्माना
इन विधेयकों में संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में निर्दिष्ट संस्थाओं और व्यक्तियों की संपत्ति पर रोक लगाना और जब्त करना शामिल है। यही नहीं बल्कि यूएन की सूची में बताए गए लोगों की यात्रा व उनके हथियार रखने पर रोक लगाना और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले लोगों के लिए भारी जुर्माना और लंबी अवधि की जेल के उपाय शामिल हैं। विधेयक के सीनेट में रुकने से पाक की किरकिरी विश्व स्तर पर होना तय है।