भारतीय छात्रों की गिरफ्तारी मामले में प्रतिष्ठित वकील ने अमेरिका सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। भारतीय अमेरिकी वकील अनु पेशावरिया ने अमेरिका के आंतरिक सुरक्षा विभाग पर जानबूझकर ‘फर्जी विश्वविद्यालय’ स्थापित करने और सैकड़ों मील दूसरे देश के छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। एक दिन पहले ही अमेरिकी सरकार ने फर्जी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने वाले छात्रों की व्यापक गिरफ्तारी और संभावित प्रत्यर्पण को लेकर भारतीयों को ही दोषी ठहराया था।
कैलिफोर्निया में प्रवासी मामलों की वकील अनु ने मंगलवार को कहा, ‘अमेरिकी सरकार के इस अभियान का सैकड़ों भारतीय छात्रों पर विध्वंसकारी असर पड़ेगा। हम यह नहीं कह रहे कि हमारे छात्रों की गलती नहीं है। उन्हें यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले पूरी छानबीन कर लेनी चाहिए थी। अगर उन्होंने जानबूझकर गलती की है तो उन्हें सजा मिलनी चाहिए। लेकिन अगर उन्हें फंसाया गया है या अपराध करने के लिए बढ़ावा दिया गया है तो हमें उनकी मदद करनी होगी।’
अमेरिका के आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन के अनुसार, फर्जी यूनिवर्सिटी ऑफ फर्मिंगटन के 600 में से 130 छात्रों को पिछले सप्ताह हिरासत में लिया गया था, जिनमें से 129 भारतीय छात्र हैं। हालांकि कई को रिहा कर दिया गया है या उनकी गतिविधियां प्रतिबंधित कर दी गई हैं। इनमें से कई छात्र अमेरिका छोड़ चुके हैं। पेशावरिया ने कहा कि कुछ छात्रों को चिंता है कि उनकी गिरफ्तारी उनके आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी, तो इतने वर्षों की उनकी शिक्षा का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
छात्रों के परिजनों पर भारी कर्ज
पेशावरिया ने कहा कि उनके पास डरे और सहमे छात्रों और उनके परिवारवालों के लगातार फोन आ रहे हैं। कई छात्रों के परिवारवालों ने बताया कि उन पर भारी कर्ज है। वे बर्बाद हो गए हैं। वकील ने कहा, ‘हम सभी छात्रों को तत्काल रिहा कराने के लिए लड़ रहे हैं। छात्र मुझे फोन कर रहे हैं कि अमेरिकी सरकार उन्हें निर्वासन के लिए मजबूर कर रही है, लेकिन वे अपनी डिग्रियां वापस चाहते हैं। इस पूरे प्रकरण से उन्हें जो नुकसान हुआ है, उसके लिए वे मुआवजा चाहते हैं।