रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन को लेकर म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की पूरी दुनिया के निशाने पर हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने भी चेतावनी दी थी कि सू की के पास हिंसा रोकने का ये आखिरी मौका है।
हालांकि सू की ने अपने ताजा बयान में कहा है कि उन्हें रोहिंग्या मुसलमानों से हमदर्दी है, लेकिन वो किसी भी निंदा की परवाह नहीं करतीं। सू की का भारत से खास नाता रहा है। आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ अहम पहलू...
-आंग सान सू के नाम का मतलब उज्ज्वल जीत का अद्भुत संग्रह होता है
-परिवार के तीन लोगों के नामों को मिलाकर उनका नाम बना है। 'आंग सान' पिता, 'सू' दादी और 'की' उनकी मां का नाम है।
-उनकी मां खिन की 1960 में भारत में बर्मा की राजदूत रह चुकी हैं।
-1960 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उनकी मां खिन को लुटियंस दिल्ली के 24 अकबर रोड पर एक बंगला गिफ्ट दिया था, जो अब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मुख्यालय है।
-सू की ने नई दिल्ली के जीसस एंड मैरी स्कूल से प्रारम्भिक शिक्षा ली, इसके बाद 1964 में लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति में स्नातक की डिग्री हासिल की।
-उस वक्त इस बंगले को बर्मा हाउस के नाम से जाना जाता था।
- उन्हें लगभग 15 साल तक घर में नजरबंद रखा गया।
-1991 में सू की को शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।
-सू के पिता आंग सान बर्मा स्वतंत्रता सेना के कमांडर थे और उन्होंने ब्रिटेन से आजादी के लिए बातचीत की। जवाहर लाल नेहरू के आंग सांग से घनिष्ठ संबंध थे। बर्मा की आजादी के लिए जब वे महत्वपूर्ण बातचीत के लिए लंदन से जा रहे थे, तब उन्होंने पंडित जी से दिल्ली में मुलाकात की। नेहरू ने उन्हें सलाह और कपड़े का एक नया सेट तोहफे में दिया।