सोशल मीडिया दिग्गजों फेसबुक और ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) ने ऐसे किसी भी बदलाव का जोरदार विरोध किया, जो अमेरिकी सरकार को कंटेंट मॉडरनेशन से जुड़े आदेश जारी करने की इजाजत देंगे। उन्होंने कहा कि उनके प्लेटफार्म एक नया उद्येग है और उसके लिए अलग तरह का नियामक मॉडल होना चाहिए।
दोनों सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के सीईओ ने मांगा अपनी इंडस्ट्री के लिए अलग नियामक मॉडल
हालांकि कानूनविदों समेत फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग और ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी ने मंगलवार को 1996 के संचार शालीनता अधिनियम की विवादित धारा 230 में बदलाव की आवश्यकता पर सहमति जताई है।
धारा 230 आम तौर पर तीसरे पक्ष की सामग्री से वेबसाइट प्रकाशकों के लिए प्रतिरक्षा प्रदान करती है और कहती है कि कोई इंटरैक्टिव कंप्यूटर सेवा का कोई प्रदाता या उपयोगकर्ता किसी अन्य सूचना सामग्री प्रदाता द्वारा प्रदान की गई किसी भी जानकारी के प्रकाशक या वक्ता के रूप में नहीं माना जाएगा। यह धारा नई तरह की तकनीकों को विकसित होने का मौका देने के लिए बनाई गई थी।
डोर्सी ने अमेरिकी सीनेट की न्यायिक समिति के सामने सुनवाई में माना कि इस बात को लेकर चिंताएं हैं कि ट्विटर अपने कंटेंट को कैसे मॉडरेट करता है और खासतौर पर धारा 230 का उपयोग करने को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। सीनेट न्यायिक समिति सेंसरशिप व 2020 चुनाव को लेकर सुनवाई कर रही है।