बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने का लगातार रूप से प्रयास के बीच संयुक्त राष्ट्र ने बयान जारी किया है। यूएन के अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यर्पण एक द्विपक्षीय प्रक्रिया है और उम्मीद है कि दोनों देश एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से वापस लाने का लगातार रूप से प्रयास किया जा रहा है। इसी बीच इस मामले में संयुक्त राष्ट्र ने अपना बयान जारी किया है। जहां उनके शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि प्रत्यर्पण एक द्विपक्षीय प्रक्रिया है और उम्मीद है कि दोनों देश एक-दूसरे का सहयोग करेंगे।
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बता दें कि बीते दिनों बांग्लादेश में व्यापक अशांति के दौरान लगभग 1400 प्रदर्शनकारी मारे गए। हजारों हताहत हुए। इसके बाद हालात इतने बिगड़े कि अगस्त, 2024 में शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा। फिलहाल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार शेख हसीना को भारत से प्रत्यर्पित कराने के प्रयास में लगी है। भारत ने अभी अपना फैसला नहीं लिया है।
रोरी मुंगोवेन का बयान
मामले में बांग्लादेश सरकार के बढ़ते प्रयास के बीच संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख रोरी मुंगोवेन ने कहा कि प्रत्यर्पण के मामले में उचित प्रक्रिया और अंतर्राष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि प्रत्यर्पण के अलावा, बांग्लादेश को शरण लेने वाले लोगों से जुड़े मामलों में अन्य तरीकों से भी सहयोग किया जा सकता है, जैसे कि भ्रष्टाचार की जांच और गलत तरीके से अर्जित संपत्तियों का पता लगाना। साथ ही मुंगोवेन ने यह भी कहा कि यदि शेख हसीना को प्रत्यर्पित किया जाता है, तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि निष्पक्ष सुनवाई हो और उचित प्रक्रिया का पालन किया जाए।
गैरतलब है कि बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने शेख हसीना और उनके पूर्व मंत्रियों के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोपों में गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। हसीना और भारत से उनके प्रत्यर्पण पर चर्चा करते हुए मुंगोवेन ने कहा कि यह एक द्विपक्षीय प्रक्रिया है और दोनों देशों को सहयोग करना चाहिए।
राजदूत तुर्क का बयान
वहीं, संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने भी बांग्लादेश में न्यायिक प्रक्रिया सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के अपराधियों को दंड से बचने का मौका नहीं मिलना चाहिए। देखा जाए तो भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के समय में संबंध तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों और हसीना सरकार के खिलाफ उठाए गए आरोपों के कारण।