स्पेन में बढ़ते आवासीय संकट के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब सड़क पर दिखाई दे रहा है। किराए के बढ़ते बोझ और घरों की कमी से परेशान हजारों लोग देश के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर स्पेन में आवास का संकट इतना गहरा क्यों हो गया? लोगों की नाराजगी की वजह क्या है? सरकार का इस पर क्या रुख है?
स्पेन में आवासीय संकट कितना बड़ा है?
स्पेन में आवास का संकट कई वर्षों से बढ़ रहा है। देश में किराए पर रहने वाले लोगों के लिए घर का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। रियल एस्टेट वेबसाइट आइडियलिस्टा के मुताबिक, 2016 में स्पेन में औसत किराया 8.20 यूरो प्रति वर्ग मीटर था, जो इस साल बढ़कर 15.10 यूरो प्रति वर्ग मीटर हो गया। यानी करीब 10 साल में औसत किराया लगभग दोगुना हो गया है।
इस संकट का असर खासतौर पर गरीबों और युवाओं पर पड़ रहा है। कम आय वाले लोगों के लिए अपना घर खरीदना मुश्किल है, जबकि किराए के मकानों की उपलब्धता भी सीमित है। स्पेन सरकार के मुताबिक, देश में किराए पर रहने वाले 26 प्रतिशत लोग अपनी आय का औसतन 40 प्रतिशत हिस्सा किराए और यूटिलिटी पर खर्च करते हैं। यूरोपीय संघ में ऐसे किरायेदारों का औसत 18 प्रतिशत है।
सरकारी मकानों की कमी भी इस समस्या को बढ़ाती है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन यानी ओईसीडी के देशों में स्पेन उन देशों में शामिल है, जहां सरकारी स्वामित्व वाले किराए के मकानों की संख्या बहुत कम है। स्पेन में उपलब्ध मकानों में सरकारी किराए के मकानों की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से भी कम है, जबकि यूरोपीय संघ का औसत आठ प्रतिशत है।
यानी जिन लोगों के पास घर खरीदने की क्षमता नहीं है, उनके सामने सीमित किराए के मकानों और बढ़ते किराए का दबाव है। यही वजह है कि आवास का मुद्दा धीरे-धीरे आर्थिक परेशानी से बढ़कर राजनीतिक मुद्दा बन गया।
विरोध की शुरुआत कहां से हुई?
हालिया विरोध की चिंगारी 87 साल की मारिया डेल कारमेन अबासकल की बेदखली से भड़की। वह स्पेन की राजधानी मैड्रिड में अपने घर में करीब 70 साल से रह रही थीं। जिस इमारत में उनका घर था, उसे एक अंतरराष्ट्रीय निवेश फंड ने खरीद लिया। इसके बाद उनका किराया 200 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाकर करीब 1,880 डॉलर प्रति माह कर दिया गया। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, किराए में यह भारी बढ़ोतरी लंबे समय से रह रही किरायेदार को हटाकर उस जगह को ज्यादा मुनाफे वाले पर्यटक अपार्टमेंट में बदलने की कोशिश से जुड़ी थी।
अबासकल व्हीलचेयर का इस्तेमाल करती हैं और उनकी बेदखली के दौरान की तस्वीरों ने लोगों को भावुक कर दिया। पुलिस की मौजूदगी में उन्हें उनके घर से बाहर निकाले जाने की तस्वीरें टेलीविजन पर प्रसारित हुईं और इसके बाद मैड्रिड सहित दूसरे शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए।
बाद में अबासकल अपने घर लौट सकीं। जिस रियल एस्टेट कंपनी ने उन्हें बेदखल करने पर जोर दिया था, उसने उनके घर को ज्यादा कीमत पर किराए पर देने की कोशिश के बीच समझौता किया और उन्हें वापस लौटने की अनुमति मिली। इसके बावजूद उनकी कहानी आंदोलन का प्रतीक बन गई। प्रदर्शनकारियों ने 'अब एक और मारिकारेमेन नहीं' जैसे नारे लगाए।
स्पेन में कितना बढ़ा किराया?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
आवास संकट में पर्यटन की भूमिका क्या है?
स्पेन में बड़े पैमाने पर पर्यटन को भी आवासीय संकट से जोड़कर देखा जा रहा है। देश में पहले से ही बड़े पैमाने पर पर्यटन के खिलाफ प्रदर्शन होते रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पर्यटकों के लिए इस्तेमाल होने वाले अपार्टमेंट और रियल एस्टेट में निवेश से आम लोगों के लिए उपलब्ध मकानों पर दबाव बढ़ता है और किराए ऊपर जाते हैं।
स्पेन दुनिया के सबसे ज्यादा पर्यटक आने वाले देशों में शामिल है। पिछले साल करीब 9.7 करोड़ पर्यटक स्पेन पहुंचे थे और देश दुनिया में दूसरा सबसे ज्यादा देखा जाने वाला देश था। ऐसे में पर्यटन से जुड़े आवासीय दबाव का मुद्दा पहले से मौजूद किराए के संकट के साथ जुड़ गया है।
सरकार ने संकट से निपटने के लिए क्या किया?
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की स्पैनिश सोशलिस्ट वर्कर्स पार्टी और वामपंथी सुमार से बनी अल्पमत गठबंधन सरकार ने आवासीय संकट को लेकर दो आपातकालीन डिक्री संसद में पेश कीं। इनका मकसद किरायेदारों को ज्यादा सुरक्षा देना और आवास बाजार में बढ़ते दबाव को कम करना था।
पहले प्रस्ताव में कमजोर लोगों की बेदखली रोकने की व्यवस्था थी। इसके साथ रियल स्टेट में सट्टेबाजी को मुश्किल बनाने, कम अवधि के किराए के समझौतों पर ज्यादा सख्ती लगाने और किराए के मकान बनाने के लिए कर में प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव था।
दूसरे प्रस्ताव में किराए के समझौते की अवधि खत्म होने के बाद उसे अपने आप जारी रखने की व्यवस्था थी। इसे प्रभावी तौर पर अनिश्चित अवधि तक जारी रखा जा सकता था। अगर मकान मालिक अनुबंध खत्म करना चाहता तो उसे किरायेदार को 12 महीने के किराए के बराबर भुगतान करना पड़ता।
स्पेन में हो रहा प्रदर्शन
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पेड्रो सांचेज ने सांसदों से क्या अपील की?
मतदान से पहले प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने सांसदों से राजनीतिक हितों और दबाव से ऊपर उठकर आम लोगों के बारे में सोचने की अपील की। उन्होंने उन लाखों युवाओं का जिक्र किया जो अपने माता-पिता का घर छोड़कर अलग नहीं रह पा रहे हैं। उन्होंने बढ़ते किराए के कारण लगातार चिंता में रहने वाले परिवारों का भी उल्लेख किया।
लेकिन सरकार की अपील काम नहीं आई। 350 सदस्यों वाले संसद के निचले सदन में दोनों प्रस्ताव बहुमत हासिल नहीं कर सके।
संसद में सरकार के प्रस्ताव क्यों अटक गए?
सरकार के लिए सबसे बड़ा झटका कैटेलोनिया की अलगाववादी पार्टी जुंत्स के विरोध से लगा। जुंत्स ने सरकार के आवास संबंधी प्रस्तावों का समर्थन करने से इनकार कर दिया। पार्टी का तर्क था कि अगर मकान मालिकों पर इस तरह की पाबंदियां लगाई गईं तो वे अपने घर किराए के बाजार से निकाल सकते हैं। इससे किराए के लिए उपलब्ध मकानों की संख्या कम होगी और कीमतें और बढ़ सकती हैं।
केंद्रीय-दक्षिणपंथी पीपुल्स पार्टी और दक्षिणपंथी वॉक्स ने भी प्रस्तावों के खिलाफ मतदान किया। जुंत्स की सांसद मिरियम नोगेरास ने सरकार पर आरोप लगाया कि अगर वह वास्तव में लोगों की सुरक्षा करना और आवास बाजार को सक्रिय करना चाहती थी तो उसे पहले ही ऐसा करना चाहिए था।
वहीं, स्पेन की स्वास्थ्य मंत्री मोनिका गार्सिया ने विपक्षी दलों पर ऐसे आर्थिक मॉडल का समर्थन करने का आरोप लगाया, जिसमें एक छोटा वर्ग बढ़ते किराए से फायदा उठाता है और बड़ी संख्या में कामकाजी लोग बढ़ते किराए के बोझ में दबते हैं।
क्या सरकार के प्रस्तावों की आलोचना भी हुई?
सरकार के प्रस्तावों को लेकर विशेषज्ञों की भी पूरी सहमति नहीं थी। बार्सिलोना विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की प्रमुख मार्ता सोलर गार्ट ने मतदान से पहले कहा था कि दोनों प्रस्ताव आवास की समस्या का मध्यम या लंबे समय का समाधान नहीं करते।
उन्होंने वियना के आवास मॉडल का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक वियना में कम किराए की व्यवस्था सिर्फ किराया नियंत्रण की वजह से नहीं है, बल्कि वहां लंबे समय से बड़े स्तर पर सार्वजनिक सामाजिक आवास बनाए और बनाए रखे गए हैं। इसके उलट स्पेन में सरकारी पैसे से बनाए गए सामाजिक आवास का एक हिस्सा बाद में बाजार कीमत पर बेच दिया गया।
गार्ट ने यह भी कहा कि प्रस्ताव छोटे या कम संख्या में मकान रखने वाले मकान मालिकों के लिए मुश्किल पैदा कर सकते हैं। इनमें पांच साल के किराए के समझौते को दो साल और बढ़ाने व लीज को अनिश्चित अवधि तक जारी रखने जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं। हालांकि अगर मकान मालिक यह साबित कर दे कि उसे मकान अपने इस्तेमाल के लिए चाहिए तो ये विस्तार अनिवार्य नहीं होंगे।
लोगों की क्या है मांग?
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सड़क पर क्या हुआ?
सरकार के प्रस्ताव खारिज होने के बाद 3 अक्तूबर को स्पेन के करीब 50 शहरों में हजारों लोग बढ़ते आवासीय संकट के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। राजधानी मैड्रिड में सरकार के मुताबिक करीब 70 हजार प्रदर्शनकारी जुटे। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ते किराए, बेदखली और किफायती घरों की कमी को लेकर सरकार से कार्रवाई की मांग की। कुछ लोगों ने किराए की समस्या के समाधान के लिए आम हड़ताल की मांग भी उठाई। रॉयटर्स के मुताबिक, देश के करीब 50 शहरों में हुए प्रदर्शनों में ज्यादातर जगहों पर स्थिति शांतिपूर्ण रही।
मैड्रिड के पुएर्ता डेल सोल में करीब 1,000 प्रदर्शनकारी डेरा डाले रहे। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार किरायेदारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, वे वहां से नहीं हटेंगे। बार्सिलोना के प्लाजा कैटालुन्या में भी ऐसा ही प्रदर्शन शिविर लगाया गया।
प्रदर्शनों के दौरान ज्यादातर जगहों पर स्थिति शांतिपूर्ण रही, लेकिन वेलेंसिया में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। वहां प्रदर्शनकारियों ने एक रियल एस्टेट सम्मेलन के बाहर सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। करीब 30 प्रदर्शनकारी वेलेंसिया के प्रसिद्ध कला एवं विज्ञान नगर परिसर में घुस गए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने बाहर निकाल दिया।
मैड्रिड में भी तनाव देखने को मिला। पुलिस ने एक दक्षिणपंथी समूह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। स्पेन सरकार के मुताबिक, कुछ दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने नाजी सलामी दी और पुएर्ता डेल सोल में आवास संकट को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। पुलिस ने शनिवार रात वहां रबर की गोलियां भी चलाईं। हालांकि करीब 50 शहरों में हुए बाकी प्रदर्शनों को रॉयटर्स ने शांतिपूर्ण बताया।
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा किस बात को लेकर है?
किरायेदारों के संगठन का कहना है कि सरकार की नीतियां लोगों की वास्तविक समस्या का समाधान नहीं कर पा रही हैं। किरायेदार संघ की प्रवक्ता वालेरिया राकू ने कहा कि इन प्रदर्शनों में लंबे समय बाद ऐसा जन उत्साह दिखाई दिया है और यह दिखाता है कि लोग अपनी मांगों के लिए सड़कों पर दबाव बना सकते हैं।
क्या आवास संकट से सांचेज की सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा?
हां। आवास स्पेन में ऐसा मुद्दा है जो सीधे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकता है। आठ साल सत्ता में रहने के बाद आवास का मुद्दा प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के लिए खासतौर पर शिक्षित युवा वर्ग में समर्थन कम होने की वजह बन रहा है।
सरकार के सामने एक और समस्या यह है कि आवास से जुड़े कई अधिकार देश की अलग-अलग सरकारी व्यवस्थाओं के पास हैं। इस वजह से केंद्र सरकार के लिए अकेले पूरे संकट का समाधान करना आसान नहीं है।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की बढ़ी मुश्किलें
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विपक्ष ने सांचेज पर क्या दबाव बनाया?
संसद में आवास सुधार प्रस्तावों की हार के बाद केंद्र-दक्षिणपंथी पीपुल्स पार्टी के नेता अल्बर्टो नूनेज फेइखो ने प्रधानमंत्री सांचेज से जल्द चुनाव कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सांचेज के पास न तो संसद का समर्थन है और न ही सड़कों पर लोगों का।
क्या स्पेन में समय से पहले चुनाव होंगे?
प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने आखिरकार सोमवार को समय से पहले आम चुनाव कराने की घोषणा कर दी। चुनाव 29 नवंबर को होंगे। स्पेन में आम चुनाव पहले जुलाई 2027 में होने थे।
इस तरह स्पेन का आवासीय संकट अब सिर्फ किराए और घरों की कीमत तक सीमित मुद्दा नहीं रहा। एक बुजुर्ग महिला की बेदखली से शुरू हुआ गुस्सा संसद में सरकार की हार, देशभर में प्रदर्शनों और अंततः समय से पहले चुनाव के एलान तक पहुंच गया।