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एक्सप्लेनर: कौन हैं नेविल रॉय सिंघम, क्या भारत से लेकर फ्रांस तक में हो रहे प्रदर्शनों की आग में डाल रहे घी?

Fri, 23 Oct 2026 06:35 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

नेविल रॉय सिंघम का नाम भारत समेत 13 देशों में हुए प्रदर्शनों से जुड़े कथित नेटवर्क को लेकर चर्चा में है। फॉक्स न्यूज डिजिटल की रिपोर्ट में 101 संगठनों का जिक्र है। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस पर सिंघम से जुड़े संगठनों के संपर्क को लेकर सवाल उठाए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
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क्या है मामला? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी टेक कारोबारी नेविल रॉय सिंघम एक बार फिर कथित विदेशी प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय विरोध प्रदर्शनों से जुड़े नेटवर्क को लेकर चर्चा में हैं। एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट में 100 से ज्यादा संगठनों का जिक्र है, जिनमें भारत में हुआ विरोध प्रदर्शन भी शामिल है।

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ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन हैं नेविल रॉय सिंघम? अभी चर्चा में क्यों हैं? भारत में पहले कब आया था सिंघम का नाम? इस बीच भाजपा क्या आरोप लगा रही है?

नेविल रॉय सिंघम आखिर कौन हैं?

नेविल रॉय सिंघम का जन्म 1954 में हुआ था। वह अमेरिका में जन्मे टेक कारोबारी हैं। उनके पिता आर्चीबाल्ड सिंघम कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े प्रोफेसर थे। उन्होंने न्यूयॉर्क में राजनीति विज्ञान पढ़ाया था।

सिंघम सॉफ्टवेयर कंसल्टिंग कंपनी थॉटवर्क्स के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन हैं। यह कंपनी दूसरी कंपनियों को सॉफ्टवेयर और तकनीक से जुड़ी सेवाएं देती है। उन्होंने 2001 से 2008 तक चीन की कंपनी हुआवेई के लिए रणनीतिक तकनीकी सलाहकार के रूप में काम किया था।

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2017 में सिंघम ने थॉटवर्क्स को निजी इक्विटी फर्म एपैक्स पार्टनर्स को बेच दिया था। इस सौदे की कीमत 785 मिलियन डॉलर से अधिक बताई गई थी। कंपनी बेचने के बाद उनका नाम कई राजनीतिक, सामाजिक, शोध और मीडिया संगठनों को आर्थिक मदद देने के संदर्भ में सामने आया। सिंघम फिलहाल चीन के शंघाई में रहते हैं। 

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नेविल रॉय सिंघम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

अभी क्यों चर्चा में हैं नेविल रॉय सिंघम?

फॉक्स न्यूज डिजिटल की पत्रकार असरा क्यू. नोमानी की रिपोर्ट में अमेरिका समेत 13 देशों में 101 संगठनों का जिक्र किया गया है। 20 अक्तूबर को प्रकाशित इस रिपोर्ट में इन संगठनों पर यूरोप और अन्य देशों में प्रदर्शनों के आयोजन, समन्वय या प्रचार में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है। भारत का नाम भी रिपोर्ट में शामिल है। आसान शब्दों में कहें तो यूरोप और भारत में हो रहे प्रदर्शनों में इन संगठनों की फंडिग होने का शक जताया गया है। जिन संगठनों पर ये आरोप लगें हैं उनमें कई संगठन ऐसे हैं जिनका संबंध नेविल रॉय सिंघम से है। 

इस खुलासे के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने 10 अप्रैल 2025 को 10 जनपथ में सिंघम से जुड़े संगठन प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या एसआईआर विरोधी प्रदर्शनों के दौरान पार्टी का इस संगठन के साथ समन्वय था और उस समय दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी। उन्होंने राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा को लेकर भी सवाल उठाए और पूछा कि क्या इसका नवंबर में प्रस्तावित प्रदर्शन से कोई संबंध है। भंडारी ने आरोप लगाया कि भारत में सड़क पर हिंसा और अराजकता के जरिए सत्ता परिवर्तन की कोशिश की जा रही है। 
 
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने भी एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें भारत में हो रहे प्रदर्शनों की फंडिंग पर सवाल उठाए गए। एक अन्य वीडियो में उन्होंने जॉर्ज सोरोस से जुड़े समूह पर इन प्रदर्शनों के पीछे होने का आरोप लगाया था।

नेविल रॉय सिंघम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

क्या भारत में पहले भी आया था सिंघम का नाम?

सिंघम का नाम भारत में पहले भी विदेशी फंडिंग से जुड़े विवाद में सामने आ चुका है। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2023 में उनके वित्तीय नेटवर्क और वामपंथी विचारधारा से जुड़े संगठनों को आर्थिक मदद देने के बारे में जांच रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट में उनके नेटवर्क से जुड़े संगठनों और उनकी गतिविधियों पर सवाल उठाए गए थे।

इसके बाद भारत में डिजिटल समाचार मंच न्यूजक्लिक को मिले विदेशी फंड और उसके इस्तेमाल को लेकर जांच हुई। न्यूजक्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और मानव संसाधन विभाग के प्रमुख अमित चक्रवर्ती को अक्तूबर 2023 में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मामले में विदेशी फंडिंग और चीन समर्थक नैरेटिव को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए थे।  
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भाजपा का आरोप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
नवंबर 2022 में इंटेलिजेंस ऑनलाइन ने खुलासा किया कि नेविल यूक्रेन को पश्चिमी समर्थन के खिलाफ पैरवी करने वाले समूहों को गुप्त रूप से धन मुहैया करा रहा था। यह सब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के खिलाफ प्रयासों की आड़ में करने का आरोप है।

इससे पहले अमेरिकी पत्रिका न्यू लाइन्स पत्रिका की जनवरी 2022 की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नेविल ने गैर-लाभकारी संगठनों के एक नेटवर्क को लगभग 65 मिलियन डॉलर दिए हैं। आरोपों के मुताबिक, इन संगठनों ने चीन में उइगर मुस्लिमों के नरसंहार से इनकार किया।
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