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एक्सप्लेनर: विमान हाईजैक कर इस्राइल को ऐसा जख्म देना चाहता था हमाम; 174 नहीं, निशाने पर थी हजारों की जान?

Mon, 05 Oct 2026 05:02 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

बीते दिनों फ्लाईदुबई की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और 9/11 की यादें ताजा कर दी हैं। सह-पायलट हमाम अल-हमामी पर विमान को हाईजैक कर तेल अवीव में हमला करने की योजना के आरोप हैं। आखिर क्या था पूरा मामला और क्यों अजरीली टावर्स का नाम सामने आया? आइए जानते हैं।

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फ्लाईदुबई मामले में नया खुलासा - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 के कॉकपिट में हुए हमले के बाद तेल अवीव के अजरीली टावर्स चर्चा में हैं। जांच से जुड़े दावों के मुताबिक, सह-पायलट हमाम अल-हमामी सिर्फ विमान पर कब्जा करने की कोशिश नहीं कर रहा था, बल्कि विमान को आतंकी हमले के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बना रहा था। एक वरिष्ठ अमीराती सूत्र के मुताबिक, उसका संभावित निशाना तेल अवीव का अजरीली सेंटर हो सकता था।

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हमाम का प्लान क्या था? क्या हमले की पहले से तैयारी की जा रही थी? आखिर अजरीली टावर्स इतने अहम क्यों हैं? इनकी खासियत क्या है? फ्लाईदुबई के घटना की तुलना 9/11 से  क्यों हो रही है? आइये जानते हैं...

फ्लाईदुबई के विमान में क्या हुआ था?

फ्लाइट FZ1073 में 30 सिंतबर को दुबई से तेल अवीव जाते समय कॉकपिट में सह-पायलट हमाम अल-हमामी ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कॉकपिट में रखी आपातकालीन कुल्हाड़ी से हमला किया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। हमले में कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन उन्होंने विमान का नियंत्रण बचाए रखने के लिए संघर्ष किया और घायल हालत में कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद यात्री और क्रू के सदस्य अंदर पहुंचे और सह-पायलट को काबू में किया। इसके बाद विमान में सवार दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने नियंत्रण संभाला और विमान की सऊदी अरब के तबूक में आपात लैंडिंग कराई।

क्या था हमाम का प्लान?

इस्राइली मीडिया यनेट की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ता इस आरोप की जांच कर रहे हैं कि हमाम विमान को हाईजैक कर इस्राइल की किसी ऊंची इमारत से टकराना चाहता था। संभावित निशाने के तौर पर अजरीली टावर्स का नाम सामने आया है। 

दावे के मुताबिक, योजना सीधे विमान को लेकर किसी इमारत से टकराने की नहीं थी। हमाम कथित तौर पर विमान पर कब्जा करने के बाद उसे सामान्य तरीके से तेल अवीव तक ले जाना चाहता था और आखिरी समय में उसे किसी बड़े निशाने से टकरा सकता था। यानी विमान तब तक सामान्य उड़ान जैसा दिखाई देता, ताकि एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सुरक्षा एजेंसियों को समय रहते शक न हो। बेन गुरियन हवाई अड्डे से अजरीली टावर्स की दूरी करीब 23.4 किलोमीटर है।

क्या हमले की पहले से तैयारी की जा रही थी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमाम पिछले कुछ महीनों में कई बार इस्राइल और बेन गुरियन हवाई अड्डे जा चुका था। जांचकर्ता अब इन यात्राओं की भी पड़ताल कर रहे हैं।

दावा है कि वह जून में इस्राइल गया था और वहां संभावित हमले के लिए जानकारी जुटाई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक उसने जुलाई में हमले की योजना बनाई थी, लेकिन आखिरी समय पर इसे टाल दिया। इसकी वजह चालक दल के एक सदस्य से उसकी दोस्ती बताई गई है।

अजरीली टावर्स - फोटो : Amar Ujala

आखिर अजरीली टावर्स इतने अहम क्यों हैं?

अजरीली सेंटर तेल अवीव का बड़ा व्यावसायिक और वाणिज्यिक परिसर है। इसकी सबसे खास पहचान इसकी तीन गगनचुंबी इमारतें हैं, राउंड टावर, ट्रायएंगुलर टावर और स्क्वायर टावर। इन तीनों का आकार भी अलग-अलग है। एक गोल, दूसरा त्रिकोणीय और तीसरा चौकोर। अजरीली समूह के मुताबिक, यह परिसर तेल अवीव की पहचान वाली प्रमुख इमारतों में शामिल है और शहर की क्षितिज रेखा यानी स्काईलाइन को अलग पहचान देता है।

राउंड टावर - फोटो : Amar Ujala

तीनों टावर की क्या है खासियत?

राउंड टावर

  • तीनों में सबसे ऊंचा राउंड टावर है। इसकी ऊंचाई 187 मीटर है और इसमें 49 मंजिलें हैं। हर मंजिल का क्षेत्रफल करीब 1,536 वर्गमीटर है।
  • इस टावर का निर्माण 1996 में शुरू हुआ और 1999 में पूरा हुआ। यह तेल अवीव की सबसे ऊंची इमारत रही है और निर्माण के समय इस्राइल की दूसरी सबसे ऊंची इमारत थी।
  • राउंड टावर की सबसे ऊपरी मंजिल पर इनडोर ऑब्जर्वेशन डेक और एक हाई-एंड रेस्तरां है। इसकी 48वीं मंजिल पर डेविड अजरीली का निजी कार्यालय था।
  • इस टावर की हर मंजिल पर 84 खिड़कियां हैं और पूरी इमारत में 4,000 से ज्यादा खिड़कियां हैं। इसका बाहरी घेरा करीब 141 मीटर और व्यास करीब 44 मीटर है।
टावर से जुड़ी एक खास बात यह भी है कि यहां सीढ़ियों से ऊपर पहुंचने की प्रतियोगिता आयोजित की जाती थी। 2003 में पहली वार्षिक अजरीली राउंड टावर रन-अप प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें प्रतिभागियों ने छत तक पहुंचने के लिए 1,144 सीढ़ियां चढ़ीं।

ट्रायएंगुलर टावर - फोटो : Amar Ujala

ट्रायएंगुलर टावर

दूसरा टावर ट्रायएंगुलर टावर है। अजरीली समूह के मुताबिक, इसकी ऊंचाई 169 मीटर, 45 मंजिलें और हर मंजिल का क्षेत्रफल करीब 1,448 वर्गमीटर है। इसका आकार समबाहु त्रिकोण जैसा है।

इसका निर्माण भी राउंड टावर के साथ 1996 में शुरू हुआ और 1999 में पूरा हुआ। इसमें इस्राइल की दूरसंचार कंपनी बेजेक की बड़ी मौजूदगी है और उसने टावर की कई मंजिलों पर कार्यालय बनाए हैं।

स्क्वायर टावर - फोटो : Amar Ujala

स्क्वायर टावर

तीसरा है स्क्वायर टावर। इसकी ऊंचाई 154 मीटर, 41 मंजिलें और हर मंजिल का क्षेत्रफल करीब 1,385 वर्गमीटर है। यह तीनों में सबसे छोटा टावर है। इस टावर का निर्माण कुछ समय के लिए रुक गया था। 1998 में शहरी नियोजन से जुड़े मतभेदों के कारण काम रोका गया और 2006 में दोबारा शुरू हुआ। इसका निर्माण जून 2007 में पूरा हुआ। टावर की निचली मंजिलों में कारोबार और होटल से जुड़ी सुविधाएं हैं, जबकि ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल कार्यालयों के लिए होता है।

अजरीली सेंटर में है बहुत कुछ 

तीनों टावरों की ऊंचाई और आकार अलग है, लेकिन ये एक ही बड़े परिसर का हिस्सा हैं। अजरीली सेंटर सिर्फ कार्यालयों का परिसर नहीं है। यहां खरीदारी, खाने-पीने और रहने की सुविधाएं भी हैं। पूरे परिसर का क्षेत्रफल करीब 1,51,000 वर्गमीटर है और यहां करीब 3,000 वाहनों की पार्किंग है। परिसर में करीब 280 कमरों वाला व्यावसायिक होटल भी है। यह परिसर एलईईडी गोल्ड प्रमाणित है।

अजरीली मॉल भी है इसी परिसर का हिस्सा

अजरीली तेल अवीव मॉल इसी परिसर से जुड़ा हुआ है। इसे 1998 में बनाया गया था। यहां 200 से ज्यादा दुकानें, 35 रेस्तरां और 170 किरायेदार हैं।

मॉल का क्षेत्रफल करीब 37,350 वर्गमीटर है। यह रेलवे से सीधे जुड़ा है और प्रमुख बस मार्गों से भी पहुंचा जा सकता है। यहां करीब 3,000 पार्किंग स्थान हैं।

मॉल में रेस्तरां, फास्ट फूड, कैफे और खाने-पीने के कई स्थान हैं। यह युवाओं के बीच भी लोकप्रिय रहा है। परिसर में एक समय आठ स्क्रीन वाला सिनेमा भी था, जिसे 2010 में खुदरा कारोबार के लिए इस्तेमाल किया गया। यहां फिटनेस क्लब और अन्य सुविधाएं भी हैं।

अजरीली सेंटर कहां है और यहां पहुंचना कितना आसान है?

अजरीली सेंटर के आसपास आयालोन हाईवे, बेगिन रोड और गिवात हतहामोशेत स्ट्रीट हैं। यह आयालोन हाईवे के हाशालोम इंटरचेंज के पास स्थित है।

तेल अवीव हाशालोम रेलवे स्टेशन से अजरीली सेंटर तक पैदल जाने के लिए बंद पुल बना हुआ है। बेगिन रोड से कई बसें भी यहां आती हैं। तेल अवीव अर्लोजोरोव बस टर्मिनल भी परिसर से करीब एक किलोमीटर उत्तर में है। इस्राइल में लगातार आतंकी खतरे को देखते हुए अजरीली टावर्स की सुरक्षा भी की जाती है।

अजरीली सेंटर का विस्तार भी जारी है

मौजूदा तीनों टावर और उनसे जुड़ा परिसर चालू है, लेकिन इसका विस्तार अभी जारी है। इसके लिए स्पाइरल टावर नाम से एक नई गगनचुंबी इमारत बनाई जा रही है। स्पाइरल टावर की ऊंचाई करीब 350 मीटर होगी और इसमें अधिकतम 91 मंजिलें होंगी। इसका क्षेत्रफल करीब 1,50,000 वर्गमीटर होगा।

इसमें कार्यालय, होटल, आवास और दुकानें होंगी। इसके साथ करीब 13,000 वर्गमीटर का नया मॉल और करीब 1,000 पार्किंग स्थान बनाए जाने हैं। इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। नया मॉल मौजूदा अजरीली मॉल के विस्तार के रूप में विकसित किया जा रहा है और टावर के लिए एलईईडी प्लेटिनम प्रमाणन का लक्ष्य रखा गया है।

कैसे थी हमले की प्लानिंग? - फोटो : Amar Ujala

फ्लाईदुबई के घटना की तुलना 9/11 से क्यों हो रही है?

आतंकी हमाम ने जिस तरह से सारा प्लान रचा था, उसे 9/11 के ट्विन टावर्स हमले से प्रेरित बताया गया है। 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में भी आतंकवादियों ने चार यात्री विमानों को हाईजैक किया था। इनमें से दो विमानों को न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से टकराया गया था। 

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को ही क्यों निशाना बनाया गया था?

जिस वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को 11 सितंबर 2001 को निशाना बनाया गया, वह करीब 16 एकड़ में फैला विशाल परिसर था। इसमें सात इमारतें और करीब पांच एकड़ में फैला ऑस्टिन जे. टोबिन प्लाजा था।

पूरे परिसर में करीब एक करोड़ वर्ग फीट का किराये वाला कार्यालय क्षेत्र था। 2001 में यहां 28 देशों की 430 से ज्यादा कंपनियां काम करती थीं।

इस परिसर की सबसे पहचान वाली इमारतें थीं इसके ट्विन टावर्स। नॉर्थ टावर 1,368 फीट ऊंचा था, जबकि साउथ टावर की ऊंचाई 1,362 फीट थी। नॉर्थ टावर के ऊपर लगा प्रसारण टावर और एंटीना इसकी ऊंचाई में करीब 360 फीट और जोड़ते थे।

दोनों टावर 110-110 मंजिल के थे। प्रत्येक टावर का आधार और उसकी हर मंजिल लगभग एक एकड़ के बराबर थी। तेज हवा के दौरान दोनों टावर एक तरफ से दूसरी तरफ करीब 12 इंच तक झूल सकते थे।

9/11 स्मारक एवं संग्रहालय के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर परिसर में 430 से ज्यादा कंपनियां थीं, जिनका कारोबार 28 देशों से जुड़ा था। यहां करीब 35,000 लोग काम करते थे, जबकि रोजाना करीब 70,000 कर्मचारी और पर्यटक परिसर में आते-जाते थे।
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9/11 का हमला - फोटो : Amar Ujala

11 सितंबर 2001 को क्या हुआ था?

इस हमले में 2997 लोगों की मौत हो गई। इसी हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन अल-कायदा ने ली थी।
  • सुबह 8:46 बजे अमेरिकन एयरलाइंस की फ्लाइट 11 नॉर्थ टावर से टकराई।
  • सुबह 9:02 बजे यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 175 साउथ टावर से टकराई।
दोनों टावर विमान के टकराने के तुरंत बाद नहीं गिरे। उनकी मजबूत संरचना ने शुरुआती प्रभाव के बाद भी कुछ समय तक भार को दूसरे हिस्सों में बांटकर इमारत को खड़ा रखा। लेकिन विमान की टक्कर से स्टील के कई स्तंभ क्षतिग्रस्त हुए और कई जगह स्टील पर लगी फायरप्रूफिंग हट गई। विमान का ईंधन कई मंजिलों पर फैल गया और भीषण आग लग गई।
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