मास्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके लिए उन्होंने अपना कोविड प्रोटोकॉल भी तोड़ दिया। पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के समर्थक उसे इमरान खान की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि मास्को में जैसा स्वागत हुआ, वह खान की अंतरराष्ट्रीय हैसियत का संकेत है। 23 साल बाद किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने रूस की यात्रा की है।
सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल
लेकिन विश्लेषकों ने आगाह किया है कि मास्को जाने के लिए इमरान ने जो वक्त चुना, उससे पाकिस्तान मुश्किल में फंस सकता है। इमरान के मास्को में रहते हुए ही रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया। आलोचकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में इमरान खान को यात्रा बीच में छोड़ कर लौट आना चाहिए था। लेकिन उन्होंने यह टिप्पणी कर दी थी कि वे एक रोमांचक मौके पर रूस आए हैं, उसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया गया।
जब रूसी हमले की खबर आई तो पश्चिमी मीडिया के एक हिस्से ने ये खबर दी कि इमरान खान अपनी यात्रा बीच में छोड़ कर लौट रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान के सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने तुरंत उसका खंडन कर दिया। पाकिस्तान सरकार की तरफ से इस मामले में सिर्फ यह सफाई दी गई है कि यात्रा का कार्यकम पहले से बना हुआ था। फिर हमले के बावजूद पुतिन ने अपने कार्यक्रम आम दिनों की तरह जारी रखे, जिनमें इमरान खान से बातचीत भी शामिल है।
दक्षिण एशिया संबंधी अमेरिकी विशेषज्ञ एडम विंस्टीन ने चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय शक्तियों के प्रति एक-आयामी विदेश नीति की कीमत महंगी पड़ सकती है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि इमरान खान उन गिने-चुने सरकार प्रमुखों में हैं, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने सत्ता संभालने के बाद अभी तक फोन नहीं किया है। दूसरे विश्लेषकों का कहना है कि इमरान खान ने रूस के साथ निकटता बनाने के जो ताजा संकेत दिए हैं, उससे अमेरिका की उनके और पाकिस्तान के प्रति नाराजगी और बढ़ सकती है।
विदेशी संबंधों में संतुलन बनाए रखना महत्त्वपूर्ण
अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के दक्षिण एशिया सेंटर के निदेशक उज़ैर युनूस ने कहा है कि इमरान खान जब मास्को गए, इस यात्रा के लिए इससे खराब समय कोई और नहीं हो सकता था। हालांकि युनूस ने यह भी कहा कि ये यात्रा वर्षों के कूटनीतिक प्रयास का परिणाम है, इसलिए इसे महत्त्वपूर्ण समझा जाएगा।
अखबार डॉन में लिखे अपने एक विश्लेषण में पत्रकार जाहिद हुसैन ने आगाह किया है कि बदले भू-राजनीतिक हालात के बीच पाकिस्तान को सतर्क रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा- रूस के साथ संबंध सुधारना स्वागतयोग्य है, लेकिन विदेशी संबंधों में संतुलन बनाए रखना भी बेहद महत्त्वपूर्ण है। यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि पाकिस्तान किसी एक पक्ष के खिलाफ दूसरे का साथ देता न दिखे।
अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में विश्लेषक कामरान युसूफ ने लिखा है कि अगर यूक्रेन की घटना नहीं होती, तो इमरान खान की यात्रा के परिणाम निश्चित रूप से अलग होते। लेकिन अब नए हालात में पाकिस्तान को बचते-बचाते हुए चलना होगा। खास कर यह देखते हुए कि दशकों तक पाकिस्तान के आर्थिक और सामरिक हित अमेरिका से जुड़े रहे थे।