गांधी ने नटाल भारतीय कांग्रेस के लिए एक जनसंचार तंत्र के रूप में प्रकाशन शुरू किया था, जिसे उन्होंने उस समय सरकार के दमनकारी कानूनों से लड़ने के लिए स्थापित करने में मदद की थी।
महात्मा गांधी द्वारा दक्षिण अफ्रीका में एक युवा वकील के रूप में अपने समय के दौरान शुरू किए गए 'इंडियन ओपिनियन' अखबार की 120वीं वर्षगांठ के मौके पर फीनिक्स बस्ती में रविवार को एक प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया।
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गांधी ने नटाल भारतीय कांग्रेस के लिए एक जनसंचार तंत्र के रूप में प्रकाशन शुरू किया था, जिसे उन्होंने उस समय सरकार के दमनकारी कानूनों से लड़ने के लिए स्थापित करने में मदद की थी। महात्मा गांधी के भारत लौटने के बाद, 1962 में इसके अंतिम संस्करण तक उनके बेटे मणिलाल और उनकी पत्नी सुशीला द्वारा 'इंडियन ओपिनियन' प्रकाशित किया जाता रहा।
ट्रेन की घटना के बाद शुरू किया प्रकाशन
डरबन से एक मुकदमा लड़ने के लिए प्रिटोरिया जाते समय, 1893 में पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन पर गांधी को धक्का देकर उतार दिया गया था। गांधी गोरों के लिए आरक्षित कोच में यात्रा कर रहे थे। उस ट्रेन का महात्मा गांधी के पास फर्स्ट क्लास का टिकट था। वह अपनी बर्थ में जाकर बैठ गए। इस घटना ने सत्याग्रह के लिए उनका मार्ग प्रशस्त किया और दक्षिण अफ्रीका और भारत दोनों में उत्पीड़न के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया। इसी घटना के एक दशक बाद उन्होंने 'इंडियन ओपिनियन' की शुरुआत की। गांधी द्वारा शुरू किए गए आंदोलन का मीडिया कवरेज के बिना शायद उतना प्रभाव नहीं पड़ा होगा जितना प्रभाव मीडिया कवरेज के बिना पड़ा।