पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान ने जेल से बड़ा हमला बोला है। उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर लोगों पर जुल्म करने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश के असली शासक आसिम मुनीर ही हैं।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने सेना प्रमुख आसिम मुनीर पर करारा हमला बोला है। उन्होंने जेल से कहा कि मुनीर लोगों पर जुल्म ढा रहे हैं ताकि अपनी हुकूमत लंबे समय तक चला सकें। इमरान ने यह भी दावा किया कि इस समय देश पर अघोषित मार्शल लॉ थोप दिया गया है।
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क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान इस समय जेल में बंद हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि 2024 के चुनावों में धांधली करके शहबाज शरीफ की 'कठपुतली सरकार' बनाई गई। और अब आसिम मुनीर के इशारे पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर जुल्म ढाए जा रहे हैं। एक्स पर एक पोस्ट में इमरान खान ने कहा कि आज असीम मुनीर अपने शासन को बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के लोगों पर अत्याचार कर रहे हैं, जिससे देश कमजोर हो रहा है। जिन लोगों (मुनीर एंड कंपनी) ने जनादेश चुराया है, वे डरे हुए हैं। इसी डर के कारण हमारे खिलाफ अत्याचार बढ़ रहा है।
इमरान ने आगे कहा कि मुझे और मेरी बीवी बुशरा को 'एकांत कारावास' में रखकर ये लोग चाहते हैं कि मैं मानसिक रूप से टूट जाऊं। मुझे तोड़ने की इन लोगों की योजना का असली उद्देश्य यह है कि मैं अपनी विचारधारा छोड़ दूं और जनता की आवाज दबा दी जाए।
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आगे उन्होंने देश के वर्तमान हालातों की तुलना 1971 में जनरल याह्या खान के कार्यकाल से की। जब गृहयुद्ध के बाद पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर बांग्लादेश बना था। इमरान खान ने कहा कि 1971 और आज के बीच एकमात्र अंतर यह है कि अब लोग ज्यादा जागरूक हैं। सोशल मीडिया के जरिए सभी तथ्य और जानकारी जनता के सामने रहती हैं। साथ ही लोगों ने अत्याचार के खिलाफ अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना सीख लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्दी ही यह दमनकारी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।
साथ ही, इमरान खान ने सरदार अताउल्लाह मेंगल की पुण्यतिथि के अवसर पर बलूचिस्तान में आयोजित एक रैली में हुए बम विस्फोट की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान को आतंकवाद और हाइब्रिड सिस्टम से आज़ादी चाहिए। अफगान शरणार्थियों की जबरन वापसी पर भी इमरान खान ने नाराजगी जताई। खान ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि पाकिस्तानी सरकार अफगान शरणार्थियों को देश से निकाल रही है। इस कठिन समय में हम उनके साथ खड़े हैं। खैबर पख्तूनख्वा सरकार को भी हमारे अफगान भाइयों की मदद करनी चाहिए।