दिसंबर 2021 में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन ने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का मुकाबला करने के लिए यूरोपियन यूनियन European Union) की तरफ से ग्लोबल गेटवे परियोजना शुरू करने का एलान किया था। तब कहा गया था कि 2022 में इस परियोजना से बीआरआई का बेहतर विकल्प दुनिया के सामने आ जाएगा। लेकिन 2022 में ये परियोजना एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाई।
वॉन डेर लियेन ने ग्लोबल गेटवे परियोजना के लिए 300 बिलियन यूरो की रकम जुटाने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि 2022 से 2027 तक इस रकम से विकासशील देशों में ऐसी इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं बनाई जाएंगी, जो ‘लोकतांत्रिक नियमों, फंडिंग में पारदर्शिता, और टिकाऊ विकास के लक्ष्यों के अनुरूप’ होंगी। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने बीआरआई पर परोक्ष हमला बोला था। चीन पर आऱोप है कि उसने बीआरआई के जरिए गरीब देशों को कर्ज के जाल में फंसाया है।
लेकिन बीते साल में ग्लोबल गेटवे परियोजना कोरा वादा बनी रही। यह बात साल के आखिर में यूरोपीय संसद में हुई एक सुनवाई के दौरान जाहिर हुई। जब सांसदों ने वहां कठिन सवाल पूछे, तो ईयू के अधिकारियों ने कहा कि 300 बिलियन यूरो की जो बात कही गई थी, उसमें कोई नया फंड नहीं था। बल्कि वह रकम पहले से चल रही योजनाओं के बजट को मिला कर बताई गई थी।
यूरोपीय आयोग के इंटरनेशनल पार्टनरशिप विभाग के कार्यवाहक निदेशक विन्सेंट ग्रिमॉड ने कहा- ‘ग्लोबल गेटवे में कोई नया वित्तीय साधन शामिल नहीं है। ईयू के स्तर पर इस पर कोई नई रकम खर्च नहीं की जानी है।’ उनके इस बयान पर सांसदों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई।
आयरलैंड से निर्वाचित सांसद बैरी एंड्र्यूज ने कहा- ‘तो कोई नया धन नहीं है। मेरी हमेशा यह राय रही है कि अगर नया धन नहीं है, तो कोई नई नीति नहीं बन सकती। यह सिर्फ एक प्रचार था। नजरिया यह है कि अगर इससे आपके सहयोगी देश धोखा खा सकते हैं, तो उन्हें और मूर्ख बनाया जाए।’
जर्मनी से चुनी गईं सांसद हिल्डगार्ड बेनतेले ने कहा- ‘मैं यह जानने की कोशिश में रही हूं कि कौन सी जर्मन कंपनी इस ‘एडवेंचर’ में काम कर रही है। लेकिन मुझे एक भी ऐसी कंपनी नहीं मिली।’ हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाल में ग्लोबल गेटवे के बारे में बताने के लिए मेटवर्स पर एक आयोजन हुआ। इस पर तीन लाख 87 हजार यूरो खर्च किए गए। बड़ी संख्या में लोगों ने इंटरनेट पर इस आयोजन का मखौल उड़ाया।
एक ट्विटर यूजर ने लिखा- ‘इस समय पूर्वी अफ्रीका में सूखा पड़ा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र के पास वहां शरणार्थी शिविरों में मौजूद लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। जबकि ईयू ऐसे आयोजनों पर इतनी बड़ी रकम खर्च कर रहा है।’
ब्रसेल्स स्थित थिंक टैंक मर्कटॉर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज से जुड़े विश्लेषक फ्रांसेस्का घिरेती ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘मेरी राय में बीआरआई से होड़ करने के बारे सोचना ही गलत था। बीआरआई की शुरुआत बिल्कुल अलग परिस्थितियों औऱ एक बिल्कुल अलग देश की तरफ से की गई थी। उस देश ने उस समय मौजूद खालीपन को भरने की योजना बनाई। तब इस योजना को लागू करने के लिए उसके पास धन था। दरअसल, आज अगर खुद चीन भी बीआरआई से होड़ करना चाहे, तो मेरी राय उसके लिए ऐसा सोचना बुद्धिमानी की बात नहीं होगी।’