फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

European Power Prices: अब यूरोप पर पड़ी बिजली की रिकॉर्ड महंगाई की मार

Mon, 15 Aug 2022 06:04 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स

सार

European Power Prices: यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप में गैस की कीमत लगातार बढ़ती चली गई है। कुछ समय पहले रूस ने गैस सप्लाई में कटौती कर दी। उसके बाद गैस की कीमतों में और उछाल आया...
विज्ञापन
European Power Prices - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इस हफ्ते यूरोप में बिजली की महंगाई का नया रिकॉर्ड बना। यूरोप के कई देशों में गर्म हवाओं के जारी दौर और फ्रांस के जंगलों में लगी आग ने बिजली संकट और बढ़ा दिया है। लेकिन जानकारों के मुताबिक बिजली की महंगाई का असल कारण प्राकृतिक गैस की महंगाई है। यूरोप में बहुत से बिजली घर प्राकृतिक गैस से चलते हैं।

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप में गैस की कीमत लगातार बढ़ती चली गई है। कुछ समय पहले रूस ने गैस सप्लाई में कटौती कर दी। उसके बाद गैस की कीमतों में और उछाल आया। गर्मी और नदियों में जल की आवक कम होने के कारण फ्रांस में परमाणु बिजली घरों को अपना उत्पादन घटाना पड़ा है। नदियों के जल से परमाणु रिएक्टरों को ठंडा किया जाता है। नदियों में पानी घटने का असर पनबिजली संयंत्रों पर भी पड़ा है।

अब आशंका जताई जा रही है कि यूरोप के ज्यादातर देशों में गैस और बिजली के उपभोग की राशनिंग (उपभोग की सीमा तय करना) करनी पड़ेगी। काउंसिल ऑफ यूरोपियन एनर्जी रेगुलेटर्स के अध्यक्ष अनीग्रेट ग्रोएबेल ने अमेरिकी मीडिया संस्थान ब्लूमबर्ग से बातचीत मे कहा- ‘अगर रूस ने गैस सप्लाई बंद कर दी और उपभोग के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध नही रही, तब राशनिंग का ही सहारा लेना पड़ेगा। हालांकि पूर्ण ब्लैक आउट से बचा जा सकता है, लेकिन उसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारी करनी होगी।’

बिजली के वायदा बाजार में अगले वर्ष के लिए बिजली की कीमत में 6.6 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस गुरुवार को दर 455 यूरो प्रति मेगावाट-आवर तक पहुंच गई, जो अब तक का एक रिकॉर्ड है। फ्रांस में अगले वर्ष के बिजली की दर में 7.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहां ये देर 622 यूरो प्रति मेगावाट-आवर तक पहुंच गई है। ये दर 1,100 डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल के समतुल्य है।

मीडिया विश्लेषणों के मुताबिक इस साल गर्मियों में असामान्य गर्म हवाएं चली हैं। उनकी वजह से बिजली उत्पादन में रुकावट आई है। साथ ही बिजली की मांग भी बढ़ी है। असाधारण गर्मी के कारण जल स्रोतों में पानी घट गया है। इसका असर पनबिजली और परमाणु बिजली उत्पादन पर तो पड़ा ही है, साथ ही जहाजों से ऊर्जा का जो परिवहन होता है, उस पर भी इसका असर पड़ा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सबसे खराब हालत फ्रांस में है। फ्रांस परमाणु बिजली पर काफी हद तक निर्भर है। लेकिन इस समय रखरखाव कार्यों के लिए लगभग आधे संयंत्रों को बंद करना पड़ा है। आम तौर पर फ्रांस बिजली का निर्यात करता है। लेकिन इस साल उसे आयात करना पड़ रहा है। फ्रांस के जंगलों में आग भी लगी हुई है। आग इतनी भयंकर है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तमाम यूरोपीय देशों से मदद मांगी है। उन्होंने कहा है कि आग बुझाने के लिए दस हजार फायर ब्रिगेड की जरूरत है, जिसकी व्यवस्था सभी देशों की मदद से ही हो सकेगी।

उधर ब्रिटेन सरकार ने एक चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अब कम फासला ही रह गया है। यानी जल्द ही ऐसी स्थिति आ सकती है, जब मांग पूरी करने लायक आपूर्ति नहीं रह जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें