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'पेरिस हमले से मुसलमानों में डर बढ़ेगा'

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पेरिस में हुए चरमपंथी हमला विश्व मीडिया में छाया है। शुक्रवार रात पेरिस में छह स्थानों पर हुए हमलों में 154 लोग मारे गए थे। फ्रांस के अखबारों और मैगजीनों में इसे भयानक बताया गया है।
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अखबार 'लमांड' ने एक ट्वीट में हमले को चरमपंथी हत्या और संहार बताया। ज्यादातर अखबारों में हमले, बम विस्फ़ोटों की तस्वीरें अपने पहले पन्ने पर छापी हैं। मीडिया में इसे द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फ्रांस में सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है।

'अल अरबिया' समाचार चैनल से बात करते हुए पेरिस के एक विश्लेषक ने इसे अमरीका के 11 सितंबर हमले के बाद किसी पश्चिमी देश पर किया गया सबसे बड़ा हमला बताया। अल अरबिया की वेबसाइट पर छपे एक लेख में पत्रकार मोहम्मद छबेरे लिखते हैं, "फ्रांस पर हमला उसे चेतावनी है कि वो कमज़ोर लोगों के साथ न खड़ा हो, अपने मूल्यों को छोड़ दे और सीरिया में अपनी नीति में बदलाव करे।"
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पेरिस हमले मीडिया में छाए

ब्रिटेन के अखबार गार्डियन में विश्लेषक नैटली नूगेरीड लिखती हैं कि इस हमले से मुसलमानों में डर बढ़ेगा कि उन्हें आतंकवाद से और जोड़ा जाएगा साथ ही दक्षिणपंथी समूह ज्यादा नफरत फैलाएंगे।

ब्रिटेन के एक और अखबार 'द टेलीग्राफ' में विश्लेषक कॉन कफलिन लिखते हैं कि पेरिस पर हमले ब्रिटेन सहित प्रमुख पश्चिमी देशों के लिए संकेत हैं कि इस्लामिक स्टेट जैसे गुट उनके लिए किस तरह के खतरे पेश कर सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया के अखबार 'द एज' ने संपादकीय में इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि जो लोग मासूमों का कत्ल करते हैं उनके लिए इस निंदा का कोई अर्थ नहीं लेकिन फिर भी वो इस हमले की निंदा करते हैं क्योंकि ऐसा किया जाना चाहिए।

पेरिस पर हमले पर लगातार कवरेज जारी

रूसी मीडिया में पेरिस पर हमले पर लगातार कवरेज जारी है। सभी टीवी चैनलों पर हमले पर आश्चर्य और दुख जताया गया और आतंकवाद के विरुद्ध फ्रांस का साथ देने की बात कही गई है। इस हमले को यूरोप में प्रवासियों के प्रवेश के साथ भी जोड़ कर देखा जा रहा है।

सरकारी टीवी चैनल 'रोसिया 24' पर इसे मानवता पर हमला बताया गया जबकि क्रेमलिन समर्थक एक निजी टीवी चैनल पर इसे अभूतपूर्व आतंकी हमला बताया गया।

एक चैनल पर एक टीवी प्रस्तोता ने कहा कि क्या वक्त नहीं आ गया है कि पश्चिमी देश कमज़ोर दलीलों को किनारे रखकर रूस के साथ मिलकर एक दुष्ट ताकत (आईएस) से लड़ें। एक पत्रकार ने दुख जताया कि मैगज़ीन शार्ली एब्डो पर हमले के बाद भी फ्रांस में लोग चौकस नहीं हुए।
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कम से कम 1,500 फ्रांसीसी नागरिक इस्लामिक स्टेट

भारतीय अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर विश्लेषक नलिन मेहता ने लिखा कि फ्रांस के लिए सबसे बड़ी समस्या देश के भीतर बढ़ता चरमपंथ का खतरा है और माना जाता है कि कम से कम 1,500 फ्रांसीसी नागरिक इस्लामिक स्टेट के साथ लड़ने के लिए सीरिया और इराक में गए हैं।

अमेरिकी मैगजीन 'न्यूजवीक' ने हमले पर इस्लामिक स्टेट समर्थकों के ट्विटर पर खुशियां मनाने की खबर छापी है। एक निजी अफगान टीवी चैनल से बातचीत में एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पता चलेगा कि चरमपंथ एक अफगान समस्या नहीं है बल्कि ये एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत है।
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