ब्रिटेन में एक किशोरी के पिता ने कहा है कि सोशल नेटवर्किंग साइट पर धमकाए जाने के बाद उनकी बेटी ने ख़ुदकुशी कर ली।
लटरवर्थ की हाना स्मिथ की शुक्रवार को फांसी लगने से मौत हो गई थी।
उनके पिता डेव स्मिथ ने फ़ेसबुक पर लिखा है कि उन्हें अपनी बेटी के आस्क.एफएम पेज पर धमकाए जाने वाले संदेश मिले हैं, जिनमें उससे मर जाने को कहा गया था।
लातविया स्थित आस्क.एफएम यूज़र्स को अनाम संदेश पोस्ट करने की इजाज़त देता है। यह सवाल-जवाब का एक मंच है। हाना की मौत की तहकीकात शुरू हो गई है।
सदमे में स्कूल
डेव स्मिथ ने पिछले शुक्रवार को फ़ेसबुक पर लिखा, “अपने दोस्तों को यह बता रहा हूं कि मेरी सबसे छोटी बेटी ने कल रात ख़ुदकुशी कर ली।”
उन्होंने आगे लिखा, “मेरी बच्ची की आत्मा को शांति मिले और तुम ....... को कभी माफ़ नहीं किया जाएगा। मेरा दिल दो टुकड़े हो गया है और इसे ठीक होने में बहुत वक्त लगेगा। मैं आशा करता हूं कि आप में से किसी को उस पीड़ा से न गुज़रना पड़े जिससे इस समय मैं गुज़र रहा हूं।”
उन्होंने आस्क.एफ़एम जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर ज़्यादा सख़्त नियंत्रण की मांग की है।
उन्होंने लिखा है, “मैंने देखा है कि आस्क.एफ़एम पर मेरी बेटी को कैसे लोगों ने गालियां दी हैं और यह बात कि वह अनाम रह सकते हैं, ग़लत है।”
अपने फ़ेसबुक पेज पर उन्होंने बच्चों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली साइट्स के लिए सुरक्षात्मक इंतज़ाम करने के लिए लोगों से एक ई-पेटिशन (इलेक्ट्रॉनिक याचिका) पर हस्ताक्षर करने को कहा है।
फ़ेसबुक और ट्विटर की तरह आस्क.एफ़एम पर यूज़र्स को ब्लॉक या उनकी शिकायत करने का कोई प्रावधान नहीं है।
उनकी याचिका में लिखा है, “अगर आप चाहते हैं कि हमारे बच्चों को बचाने में मदद करने के लिए सरकार आस्क.एफ़एम और ऐसी ही अन्य वेबसाइट्स पर दबाव डाले तो कृपया दस्तखत करें। वह 13 साल की उम्र से इसमें शामिल हो सकते हैं और अनाम रहकर संदेश डाल सकते हैं।”
लटरवर्थ हाई स्कूल में हाना की प्रधान अध्यापक नॉरा पार्कर ने एक बयान में कहा, “स्कूल के संचालक, कर्मचारी और विद्यार्थी यह जानकर बेहद सदमे और दुख में हैं कि दो अगस्त को नवीं की छात्रा हाना स्मिथ ने अपनी जान ले ली।”
नया पाठ्यक्रम
हाना ने इसी साल स्कूल में अपने अंतिम वर्ष की पढ़ाई पूरी की थी और वह अगस्त में लटरवर्थ कॉलेज में स्थानांतरण करवाने जा रही थी।
“वह एक सुंदर, ज़िंदादिल, लोकप्रिय, और विचारवान लड़की थी और जो भी उसके संपर्क में आया उसकी इज्ज़त करता था, उसे पसंद करता था।”
शिक्षा विभाग ने एक बयान जारी कर रहा है कि किसी को भी “धमकियों से डरना या उनका शिकार नहीं बनना चाहिए। कानून एकदम साफ़ है कि जो कि वास्तविक जीवन में गैरकानूनी है वही ऑनलाइन भी है।”
बयान में कहा गया है, “ब्रिटेन की बाल इंटरनेट सुरक्षा परिषद के माध्यम से हम सोशल नेटवर्किंग साइट्स के संपर्क में हैं और युवाओं के लिए इंटरनेट को एक सुरक्षित स्थान बनाने के लिए काम कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि नए पाठ्यक्रम में यह भी शामिल किया जाएगा कि पांच साल की उम्र से ही बच्चों को सिखाया जाए कि, “ऑनलाइन कैसे सुरक्षित रहा जाए और सुरक्षित और सम्मानजनक ढंग से कैसे संवाद किया जाए।”
लेस्टरशायर में अदालत में बताया गया कि पोस्टमार्टम अभी पूरा नहीं हुआ है इसलिए अदालत ने मामले में अगली तारीख दे दी।