हालांकि बैंकों को इन संपत्तियों में प्रवेश का निर्देश नहीं है, लेकिन इस आदेश का मतलब है कि बैंक अब लगभग 1.145 अरब पौंड की अनुमानित राशि वसूलने के लिए इस आदेश का इस्तेमाल कर सकते हैं। भारत सरकार माल्या के प्रत्यर्पण के लिए कोशिश कर रही है। माल्या भारतीय एजेंसियों की प्रत्यर्पित किए जाने की अर्जी का विरोध कर रहा है।
क्या है जज के आदेश में
जज बायरन ने 26 जून को आदेश जारी किया कि हाईकोर्ट के प्रवर्तन अधिकारी अपने अधीनस्थ किसी प्रवर्तन एजेंट के साथ लेडीवॉक, क्वीन हू लेन, टेविन, वेलिविन और ब्रांबले लॉज में तलाशी ले सकते हैं और माल्या से जुड़ी संपत्तियों को जब्त करने के मकसद से प्रवेश कर सकते हैं। जरूरत पड़ी तो प्रवर्तन अधिकारी इन परिसरों में प्रवेश के लिए यथोचित फोर्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
इस आदेश के मायने
इस मामले की जानकारी रखने वाले कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, यह आदेश बहुत जरूरी था। यह यूके की ट्रिब्यूनल अदालत और प्रवर्तन कानून 2007 से संबंधित है और हाईकोर्ट के मई में दिए आदेश के मुताबिक है। यह भारतीय अदालतों के इस आदेश की पुष्टि करता है कि ऋणदाता बैंक अपना बकाया वसूलने के हकदार हैं।
बैंकों के समूह की जीत
इस आदेश को माल्या को कर्ज देने वाले बैंकों की जीत के तौर पर देखा जा रहा है। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, कॉर्पोरेशन बैंक, फेडरल बैंक लिमिटेड, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, यूको बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और जेएम फाइनेंशियल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।