कार्ल मार्क्स ने कहा था कि समाज में दो ही वर्ग होते हैं, पूंजीपति और सर्वहारा। लेकिन बीबीसी का एक सर्वे बताता है कि ये धारणा अब पुरानी हो चुकी है। इस नए सर्वे के मुताबिक ब्रिटेन का समाज आज 7 वर्गों में विभाजित हो चुका है।
समाज विभाजन को समझने के लिए किए गए इस सर्वे में 1 लाख 61 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। इसे नाम दिया गया ग्रेट ब्रिटिश क्लास सर्वे।
इस सर्वे में कुछ नए मापदंड भी जोड़े गए। अब तक यही माना जाता था कि वर्ग विभाजन को समझने के लिए लोगों के व्यवसाय, पैसा और शिक्षा के बारे में जानना जरूरी है।
लेकिन इस सर्वे में पहली बार सामाजिक और सांस्कृति गतिविधियों को भी शामिल किया गया है।
बीबीसी लैब यूके के इस सर्वे में कहा गया कि वर्ग को समझने के लिए आर्थिक, सामजिक और सांस्कृतिक आधार को भी समझना जरूरी है।
सर्वे में आर्थिक पूंजी को आय, बचत और घर के रूप में मापा गया जबकि समाजिक पूंजी को समाजिक हैसियत और पहचान के आधार पर नापा गया।
वर्ग विभाजन कुछ इस तरह से है–
1) उच्च वर्ग- ये वर्ग समाज का सबसे ऊपरी तबका है। तीनों मापदंडों में ये बाकी के 6 वर्गों से आगे है।
2) मध्य वर्ग- वर्ग विभाजन में दूसरे पायदान पर। ये वर्ग सांस्कृतिक पूंजी के मामले में सबसे आगे है। ये समाज का सबसे बड़ा तबका है।
3) तकनीकी मध्य वर्ग- ये समाज का तीसरा वर्ग है जो पैसेवाला तो है लेकिन समाजिक हैसियत और सांस्कृतिक पूंजी के मामले में पीछे है।
4) समृद्ध कामगार– ये वर्ग समाजिक विभाजन में चौथे नंबर है। सांस्कृतिक सामाजिक रूप से सक्रिय लेकिन आर्थिक पैमाने पर ये मध्यम स्तर का है।
5) पारंपरिक कामगार वर्ग- ये वर्ग हर पैमाने पर कमजोर है लेकिन पूरी तरह से साधनहीन नहीं है। इस वर्ग के पास घर भी हैं।
6) उभरते हुए सेवक कामगर- इस वर्ग में ज्यादातर शहरों के युवक शामिल हैं। इनके पास सांस्कृतिक और सामाजिक पूंजी पर्याप्त मात्रा में है लेकिन आर्थिक पैमाने पर ये तुलानात्मक रूप से कमजोर हैं।
7) सर्वहारा वर्ग– ये समाज का सबसे निचला तबका है जो रह तरह से कमजोर है। आर्थिक, समाजिक और सांस्कृतिक हर पायदान पर ये वर्ग सबसे नीचे आता है।
इस सर्वे को करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि उच्च वर्ग की पहचान तो पहले भी की गई है लेकिन ये पहली बार है जब समाज के वर्ग विभाजन को बड़े पैमाने पर समझने की कोशिश की गई है।
समाजशास्त्रियों के मुताबिक वर्ग विभाजन को समझने की कोशिश में अब तक मध्य वर्ग और कामगर वर्ग पर ही जोर दिया जाता था लेकिन ये पहली बार है जब व्यापक पैमाने पर वर्ग विभाजन को समझने की कोशिश की गई है।
मैनचेस्टर युनिवर्सिटी में समाज शास्त्र के प्रोफेसर फियोना देविना का कहना है कि ये वर्ग विभाजन 21 वीं शताब्दी में वर्ग विभाजन को समझने में मदद करता है।
वो कहती हैं, “ये सर्वे हमें ये समझने में मदद करता है कि आज के समय में वर्ग विभाजन आखिर है कैसा। ये वर्ग विभाजन की संपूर्ण तस्वीर उपलब्ध कराता है। ये हमें नीचे तक पहुंचने में मदद करता है।”