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स्टार्टअप : फेक न्यूज की होगी पहचान, 21 वर्षीय भारतीय मूल के ब्रिटिश छात्र ने तैयार की मशीन

Mon, 23 Jul 2018 04:52 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाला
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डिजिटल होती दुनिया में फेक न्यूज एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इसका समाधान तलाशने में सरकारों के साथ-साथ दिग्गज तकनीकी कंपनियों के भी पसीने छूट रहे हैं। इस बीच भारतीय मूल के एक ब्रिटिश उद्यमी के स्टार्टअप ने फेक न्यूज से लड़ाई के लिए कमर कस ली है। कल्पना से तथ्यों को अलग करने के लिए वह एक मशीन आधारित एल्गॉरिथ्म का इस्तेमाल कर रहा है। सबसे खास बात यह है कि उसने इस योजना को भारत को ध्यान में रखकर तैयार किया है।

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कैंब्रिज विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के छात्र 21 वर्षीय लिरिक जैन मूल रूप से मैसूर के रहने वाले हैं। उन्होंने पिछले साल वेस्ट यॉर्कशायर में अपने स्टार्टअप ‘लॉजिकली’ को शुरू किया। इसके बाद उन्होंने अपने स्टार्टअप को कल्पना से वास्तविकता को अलग करने वाली मशीन आधारित एल्गॉरिथ्म प्लेटफॉर्म में तब्दील कर दिया। इस प्लेटफॉर्म का फिलहाल तकनीकी ट्रायल चल रहा है।

सितंबर में जहां इसे ब्रिटेन और अमेरिका में लांच किया जाएगा वहीं भारत में इसे अक्तूबर में लाया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म का लक्ष्य समाचार उपलब्ध कराने के साथ-साथ तथ्यात्मक शुद्धता का संकेत भी देना है। जैन ने बताया कि ‘लॉजिकली’ प्लेटफॉर्म 70 हजार से अधिक वेबसाइटों से बड़ी संख्या में खबरों को जुटाएगा और हर खबर में किए गए दावों के सत्यता की पुष्टि करेगा।
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यह सब वह एक मशीन आधारित एल्गॉरिथ्म का इस्तेमाल करके करेगा। उसका इस तरह से निर्माण किया गया है कि वह तार्किक झूठ, राजनीतिक पूर्वाग्रह और गलत आंकड़ों को पता लगा लेगा। ‘लॉजिकली’ खबरों में दी गई की जानकारी की गुणवत्ता को भी बताएगा ताकि यूजर पारदर्शिता और व्यावहारिकता के पैमाने पर तय कर सकें कि वे कितनी विश्वसनीय हैं।

यूपी पुलिस की ‘डिजिटल आर्मिज’ फेक न्यूज पर लगाएगी लगाम
फेक न्यूज के कारण होने वाली भीड़ हिंसा की घटनाओं और हिंसा को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस एक डिजिटल आर्मीज’ का गठन करेगी। प्रमुख निवासियों की यह डिजिटल आर्मीज भड़काऊ पोस्टों और अफवाहों पर कड़ी नजर रखेगी।

उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने कहा कि इस पहल के तहत राज्य के 1,469 पुलिस स्टेशनों के पास एक व्हाट्सएप ग्रुप होगा जिसमें पूर्व सैन्यकर्मियों, शिक्षकों, डॉक्टरों, वकीलों और पत्रकारों सहित अन्य क्षेत्रों के करीब 250 लोग शामिल होंगे।

यह डिजिटल सेना अपने स्थानीय पुलिस स्टेशन को सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज के बारे में जानकारी देगी। वहीं इसके साथ ही वे अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए स्थानीय लोगों के बीच सही सूचनाओं पहुंचाने का भी काम करेंगे। 

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