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खड़े होकर काम करने से घटेगा वजन

Mon, 14 Jan 2013 01:04 PM IST
बीबीसी हिंदी
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अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं और इसके लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं तो निराश मत होइए। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑफिस में खड़े होकर काम करने से आप अपनी इस हसरत को पूरा कर सकते हैं।
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चेस्टर विश्वविद्यालय के कसरत विशेषज्ञ जॉन बकले का कहना है कि हर दिन तीन घंटे खड़े रहने से प्रति वर्ष 3.6 किग्रा वजन कम किया जा सकता है। उनका कहना है कि दिनभर ऑफिस में बैठकर काम करने वालों को अपनी कुर्सियों को एक तरफ रखकर खड़े होकर काम करना चाहिए।

डॉ. बकले खुद एक ऐसी मेज का इस्तेमाल करते हैं जिससे वो खड़े-खड़े काम कर सकें। उन्होंने कहा कि इतनी देर तक बैठे रहने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि छुट्टियों के बाद खुद को मोटा महसूस कर रहे लोगों को बैठकर काम करने की बजाए खड़े होकर काम करना चाहिए।
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विशेष मेज का इस्तेमाल
आजकल विशेष तौर पर ऐसी मेज़ें उपलब्ध हैं जिन पर आप खड़े-खड़े काम कर सकते हैं या फिर आप पुरानी मेज की ऊंचाई को बढ़ा सकते हैं। जाने माने लेखक अर्नेस्ट हेमिंग्वे को खड़े होकर लिखने में महारत हासिल थी। उन्होंने 1950 में एक पत्र में लिखा था, “लिखने और यात्रा करने से आपका मोटापा बढ़ता है दिमाग नहीं। मुझे खड़े-खड़े लिखना पसंद है।”

इसी तरह एक अन्य लेखक व्लादीमिर नाबोकोव भी खड़े होकर लिखना पसंद करते थे। क्लिनिकल साइंसेज और न्यूट्रीशन विभाग के डॉ। बकले का कहना है कि कुर्सी पर बैठने की बजाए खड़े होकर काम करने से मोटापा घटता है और शरीर में रक्त संचार में सुधार आता है।

उन्होंने कहा कि तीन घंटे खड़े रहने से शरीर से 144 कैलोरी कम होती है। डॉ. बकले के मुताबिक लोग कार्यालयों में बैठे रहते हैं, फिर अपनी कारों में बैठे रहते हैं और फिर घर जाकर टीवी के आगे बैठे रहते हैं। बैठे रहने की स्थिति में आपकी चर्बी घटने की दर न्यूनतम हो जाती है।

यह मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति नहीं है क्योंकि उसके शरीर की बनावट खड़े रहने और लगातार घूमने के लिए बनी है। डॉ. बकले मोटापे से निपटने के उपाय सुझाने के लिए इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ काम कर रहे सलाहकार समूह का हिस्सा हैं।

थोड़े बदलाव से बड़ा फर्क
हाल में कई ऐसी रिपोर्ट आई हैं जो ऑफिस में अधिक देर तक काम करने और जरुरत से ज्यादा आराम करने से होने वाली समस्याओं की तरफ इशारा करती हैं।

पतझर में हुए एक अध्ययन में अधिक देर तक बैठे रहने और मधुमेह के बीच संबंध को रेखांकित किया गया था। इससे पहले एक अध्ययन में दावा किया गया था कि आरामतलब जीवनशैली उतनी ही मौतों का कारण बन सकती हैं जितनी धूम्रपान से होती हैं।

डॉ. बकले कहते हैं कि कार्य स्थान में निरंतर बदलाव से सेहत में दीर्घकालिक सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि अपने व्यवहार में थोड़ा अंतर लाकर जैसे मेज पर खड़े होकर काम करने से आप अपने स्वास्थ्य पर बड़ा फर्क पैदा कर सकते हैं।
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