न्यूज़ीलैंड की संसद ने एक कानून पारित किया है जिसके बाद देश की मुख्य खुफ़िया एजंसियों को इस बात का अधिकार दिया गया है कि वे वहां के नागरिकों पर निगरानी रख सकें और उनकी जासूसी कर सकें।
बुधवार को न्यूज़ीलैंड की संसद में इस मुद्दे पर वोटिंग हुई। इस वोटिंग में सरकारी संवाद सुरक्षा ब्यूरो (जीसीएसबी) के अधिकार को बढ़ाने का फ़ैसला 61 के मुक़ाबले 59 मतों से लिया गया।
इससे पहले जीसीएसबी के पास केवल उन नागरिकों पर निगरानी रखने का अधिकार जो न्यूज़ीलैंड के निवासी नहीं थे।
दरअसल ये कानून एक विवाद के बाद पारित हुआ जिसमें न्यूज़ीलैंड में रह रहे जर्मनी के नागरिक और इंटरनेट मुगल किम डॉटकॉम की निगरानी करने पर विवाद हुआ था।
जब प्रधानमंत्री ने मांगी माफ़ी
जीसीएसबी के अधिकारी अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिल कर ऑनलाइन पाइरेसी और मनी लॉंड्रिंग के मामलों में किम डॉटकॉम की संलिप्ता की जांच कर रहे थे।
किम इन आरोपों में अपनी संलिप्ता से इनकार करते हुए अपने अमेरिका में प्रत्यर्पण को चुनौती दे रहे थे।
इस मामले में न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री जॉन केय को पिछले साल किम डॉटकॉम से माफ़ी मांगनी पड़ी।
इस साल मार्च में एक अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि किम ग़ैरकानूनी जासूसी करने के लिए जीसीएसबी पर मुकदमा दर्ज कर सकते हैं।
यह विधेयक संसद में तीन बार पेश किए जाने के बाद पारित हुआ है।
इस विधेयक के पारित होने के बाद आम लोगों के निजी जीवन में सरकारी एजंसियों की ताकझांक बढ़ सकती है। यह आम लोगों की स्वतंत्रता और निजता पर सवालिया निशान लगा सकता है।
हालांकि संसद में न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री ने आम लोगों को भरोसा दिलाया है कि ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा, “ऐसा नहीं है और कभी नहीं होगा। न्यूज़ीलैंड के लोगों की जासूसी नहीं होगी।”
केय ने बताया है कि इस कानून में ये बात साफ़ है कि जीसीएसबी क्या कर सकती है और क्या नहीं।
कानून का विरोध
नए कानून के बनने से जीसीएसबी, पुलिस प्रशासन, ख़ुफ़िया एजंसियों और सेना की मदद से आम लोगों की जासूसी करा पाएगी।
संसद के अंदर इस विधेयक का विरोध भी हुआ है। मानवाधिकार कार्यकर्ता और कानूनी मामलों के जानकार इस विधेयक का विरोध कर रहे थे।
इस कानून को बनाए जाने के बाद किम डॉटकॉम ने कहा कि इसके ज़रिए न्यूज़ीलैंड में अब लोगों की स्वतंत्रता पर अंकुश लग जाएगा।
इस आशंका के चलते ही देश के कुछ हिस्सों में आम लोगों के विरोध प्रदर्शन की ख़बरें भी आ रही हैं।