'बहन गुम हो गई, आज तक नहीं मिली'
2008 में एक दुखद घटना हुई। ग्रेस की बहन इंटरनेट पर चैटरूम में एक व्यक्ति से बात करने के बाद उनसे मिलने गई। ग्रेस कहती हैं, "उसके बाद से 10 साल हो गए, लेकिन वो वापस नहीं आई। वो लापता हो गई थी। मैंने अपने उन दोस्तों की मदद से उसे खोजने की कोशिश की। उनके पास ब्रिटिश पुलिस के पास जाने के लिए पर्याप्त दस्तावेज थे। लेकिन सब व्यर्थ गया।" एक बार फिर ग्रेस परिवारों के बीच घूमती रहीं। लेकिन पांच साल पहले जब एक परिवार ने उनकी सेवाएं खत्म कर दीं, वो पार्क की बेंच पर या लाइब्रेरी में बैठी रहतीं। तभी एक दिन एक आदमी उनको मिला जिससे वो ब्रिटेन आने के शुरुआती दिनों में मिली थीं। उन्होंने ग्रेस को कहा कि ऐसे लोग हैं जो आपकी मदद कर सकते हैं। ग्रेस ने आश्चर्य व्यक्त किया कि उनकी मदद कौन कर सकता है। वो ग्रेस को सेंट्रल लंदन के
शरणार्थी केंद्र ले गए जहां उनकी पूरी बात बहुत ध्यान से सुनी गई और उनकी समस्याओं को सुलझाने में मदद की गई।
उन दिनों ब्रिटेन में हार्वी वाइन्सटीन की खबरें सुर्खियां बन रही थीं। कई नामी-गिरामी अभिनेत्रियों ने अपने कदम आगे बढ़ाते हुए शोषण की बात रखी थी। ये खबरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थीं। यह वो पल था जब ग्रेस को यह समझ में आया कि वो अकेली नहीं थीं। काली, शक्तिशाली, प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण महिलाएं भी यौन उत्पीड़न का शिकार हुई हैं। अब यह शर्मनाक रहस्य नहीं था जिसे उन्हें अपने तक ही सीमित रखना है। ब्रिटेन में आकर बसने वाली महिलाओं के लिए अपनी संस्था 'वूमन फॉर रिफ्यूजी वूमन' के जरिए काम कर रहीं गिरमा जो खुद इथियोपिया से आकर वहां बसी थीं, कहती हैं, "महिलाएं हफ्ते में एक बार हमसे सलाह लेने आती हैं।" गिरमा ने ही उन्हें #MeToo के बारे में बताया। इसके बाद ही इन महिलाओं ने भी उन दुर्व्यवहारों के विषय में बातें की जिससे वो पीड़ित थीं।
ऐतिहासिक क्षण
एक महिला ने तो यहां तक बताया कि जब उन्होंने एक क्लाइंट के घर की सफाई की थी तो उसकी शर्त थी कि वो केवल अपने अंडरवियर में यह काम करें। गिरमा कहती हैं, "आश्रय की प्रक्रिया दोषपूर्ण है और यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों के खिलाफ ही काम करती है। अगर आपकी कानूनी स्थिति पुख्ता नहीं है तो आपको इंसान नहीं माना जाता है। आप कानून की नजर में वास्तव में इंसान नहीं हैं।" ग्रेस की एक दोस्त यानाले को अपने साथ 10 साल पहले हुई घटनाओं के सपने आज भी आते हैं। पश्चिम अफ्रीका में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था और कुछ पुलिस अधिकारियों ने उसके साथ बंदूक की नोक पर सामूहिक बलात्कार किया था। रिहाई के बाद एक मित्र की मदद से वो लंदन आईं। शुरू में एक दोस्त के साथ रहीं फिर चर्च की मदद से एक स्थानीय परिवार में गईं।
ग्रेस की तरह ही उन्हें बच्चों की देखभाल के बदले में भोजन और सिर पर छत मिली। वो कहती हैं कि वो ग्रेस की तुलना में भाग्यशाली रहीं क्योंकि शरणार्थी की स्थिति के लिए उन्होंने तुरंत आवेदन किया। हालांकि उनके पहले आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया था। उनके मालिकों ने उनके साथ छेड़छाड़ की, लेकिन सेक्स के लिए मजबूर नहीं किया। जिस संस्कृति से वो आती हैं उनके लिए यौन उत्पीड़न पर आसानी से चर्चा करना आसान नहीं था। हालांकि पिछले साल अक्तूबर में 'वूमन फॉर रिफ्यूजी' की एक क्लास में उन्होंने इसके बारे में सुना और उनकी सोच में बदलाव आया। गिरमा कहती हैं, "ऐसा लगता है कि महिलाओं के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है। जरूरी है कि यह बदलाव समाज में ग्रेस और यानाले जैसी महिलाओं तक पहुंचे।"
शरणार्थी का दर्जा!
37 की उम्र में ग्रेस जीसीएसई की परीक्षा देना चाहती हैं। वो लोगों की मदद करना चाहती हैं। वो उम्मीद करती हैं कि मिडवाइफ के रूप में वो योग्य हो सकें। वो अब 80 वर्ष से अधिक की उम्र के एक सुंदर जोड़े के साथ रहती हैं। उनके पास आज भी ब्रिटेन में रहने और काम करने का अधिकार नहीं है। वो फूड बैंक से खाना खाती हैं और दान दिए गए कपड़े पहनती हैं। उन्हें अब भी अपनी बहन से मिलने की उम्मीद है। उन्हें यह भी उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें शरणार्थी का दर्जा मिलेगा। उन्होंने 2013 से अब तक तीन बार आवेदन किए हैं जिसे आज तक कभी खारिज नहीं किया गया। और अब वो चौथी बार आवेदन कर रही हैं।
मुश्किल ये है कि वो बिना किसी दस्तावेज के 20 सालों से ब्रिटेन में रह रही हैं, इसे कैसे साबित करें। लेकिन ग्रेस को उम्मीद है वो ये साबित करने में कामयाब होंगी। आज उनके पास एक दोस्त है जिससे वो बातें कर सकती हैं और उसकी बातें सुन सकती हैं। यानले भी शरणार्थी स्टेटस के लिए आवेदन कर रही हैं। आज भी उन्हें अपने साथ हुए सामूहिक बलात्कार के बुरे सपने आते हैं। लेकिन जब से उन्होंने #MeToo के बारे में सुना हैं, वो सपने में अपने बलात्कारियों पर चिल्लाती हैं और उन्हें अकेला छोड़ने के लिए कहती हैं। कभी-कभी वो वापस चले जाते हैं और उन्हें उनकी कोठरी में अकेला छोड़ देते हैं। कभी-कभी वो उनके साथ बलात्कार नहीं करते हैं।