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अपराध रोकेगा सॉफ्टवेयर

Wed, 31 Oct 2012 02:53 PM IST
बीबीसी हिन्दी
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अपराधियों को पकड़ने के लिए तकनीक का सहारा लंबे समय से लिया जा रहा है, लेकिन ब्रिटेन में एक ऐसी तकनीक सामने आई है जो वाकई पुलिस के लिए मजबूत हथियार साबित हो सकता है।
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‘भविष्य विश्लेषक तकनीक’ एक ऐसी तकनीक का नाम है जो पूरी तरह से डाटा आधारित होती है। ये तकनीक दरअसल एक सॉफ्टवेयर है जिसके जरिए पुलिस संभावित अपराध और इलाके की पहचान कर सकती है और समय रहते वहां पहुंच सकती है जहां घटना घटने वाली है।

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के ज़रिए पुलिस की कार्यशैली, अपराध के पुराने आंकड़े, अपराध के पैटर्न और घटना के वक्त का अध्ययन किया जाता है। जिससे किसी शहर में होने वाले अपराध, उसके समय और तरीके का करीब-करीब अंदाजा हो जाता है और अपराध को रोका जा सकता है।
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ब्रिटेन और अमेरिका में वैसे तो भविष्य में होने वाले अपराध से संबंधित कई प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहे हैं लेकिन इसे 'नई पीढी की योजना' बताया जा रहा है।

30 फीसदी अपराध हुए कम
भविष्य के अपराध को रोकने वाले सॉफ्टवेयर पर काम कर रही आईबीएम ने ब्रिटेन के विनचेस्टर स्थित अपनी प्रयोगशाला में बताया कि उनकी तकनीक की मदद से पिछले सात सालों में मेमफिस और टिनिसी इलाके में 30 प्रतिशत तक अपराध कम करने में मदद की है।

यह तकनीक दरअसल, पुलिस को अपराध के तरीके और शहर के अपराधी को पहचानने में मदद करता है। जिसके बाद संबंधित इलाके में पुलिस की तैनाती की जा सकती है और अपराधी को पकड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू कर सकती है।

कंपनी का दावा है कि मेमफिस के अलावा भी ब्रिटेन और अमरीका के दूसरे शहरों में इस तकनीक का लाभ लिया जा रहा है। भविष्य विश्लेषक तकनीक पर लॉस एंजिलस की एक कंपनी भी काम कर रही है।

लॉस एंजिलस पुलिस ने 2011 में इस सॉफ्टवेयर पर काम भी किया है और कंपनी ने बेहतरीन परिणाम का दावा भी किया है। ब्रिटेन की गोपनीय एवं जन अधिकार कैंपेन समूह ‘बिग ब्रदर वॉच’ ने इस तकनीक का स्वागत किया है।

समूह के प्रमुख निक पिकल्स का कहना है, “अपराध कम करने के लिए इस तरह की तकनीक ज्यादा प्रभावशाली तरीके से काम करती है और साथ ही आम लोगों की सुरक्षा के लिहाज से भी ज्यादा उपयोगी है जिसमें अपराधिक आंकड़ों और ‘ब्रोकेन विंडोज’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया हो।”

निक कहते हैं कि ब्रिटेन में करोड़ों पाउंड सीसीटीवी पर खर्च कर दिए गए हैं लेकिन जो साक्ष्य मिलते हैं वो आमतौर पर ज्यादा प्रभावशाली नहीं होते और इससे अपराध रोकने में खास मदद नहीं मिल पाती। कैमरे तो हर कोने पर लगे होते हैं लेकिन लोग पुलिस ऑफिसर नहीं दिखते।
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