दुनिया के हर समाज में यौन अपराध करने वालों से सर्वाधिक घृणा की जाती है। इनके पुनर्वास की बात तो छोड़ दें लोग इन्हें जीवित रखने पर भी बहस करते हैं। लेकिन लीडिया गुथ्रे को यौन अपराधियों के बीच काम करना पसंद है। उन की कहानी उन्हीं की ज़ुबानी।
जब पहली बार मैं एक यौन अपराधी से मिलने गई तो मेरी टांगें कांप रही थीं। जैसै-तैसे मैं सीढियां उतर रही थी। दिमाग में यही चल रहा था कि एक दड़बे जैसे कमरे में बैठकर मैं उस आदमी से कैसे बात कर पाऊंगीं जिसने इतना भयानक काम किया था।
एक लड़के के साथ उसने जिस तरह का अपराध किया था उसे जानकर मैं आतंकित थी। फिर मैंने खुद को समेटा और साहस बटोरते हुए उसका नाम पुकारा।
एक सामान्य सा दिखने वाला व्यक्ति सामने खड़ा था। उसके सिर पर सींग नहीं थें, ना ही उसकी कोई पूंछ थी। वह किसी भी आम आदमी की तरह दिखता था।
मैंने पहले तो अपना परिचय दिया फिर उससे पूछा कि वह अपने बारे में मुझे क्या बताना चाहता है?
वह मेरी आंखों में देखता हुआ बोल पड़ाः “मैंने कई बेहद भयानक और हिंसक अपराध किए हैं। चाहे सुबह उठूं, या रात को सोऊं, हर वक्त मेरे दिमाग में नकारात्मक बातें ही आती हैं।”
उसने आगे बताया, “मगर मैं इन सबसे बाहर आना चाहता हूं। मुझे अपना जीवन नए सिरे से शुरू करना है।”
एक तरफ तो मुझे उस इंसान से यह सोच कर नफरत हो रही थी कि उसने बच्चों और उनके परिवार वालों के साथ कितना गलत किया है।
मगर वहीं दूसरी ओर मैं एक ऐसे व्यक्ति से मिल रही थी जो अपनी आपराधिक प्रवृत्तियों में जकड़ा छटपटा रहा था। इस जकड़न से छूटने के लिए उसे मेरी मदद चाहिए थी।
असमंजस
मैं क्या करुं? क्या उसके साथ नरमी से पेश आऊं? या बेरुखी दिखाऊं? या फिर मैं एक पेशेवर होने के नाते उसकी मदद करुं? उसके जीवन को बदलने में उसकी सहायता करुं?
काफी जद्दोजहद के बाद मैंने उसकी मदद करने का फ़ैसला लिया।
मैंने उस व्यक्ति के साथ दो साल तक काम किया। और एक दिन ऐसा आया जब उसे खुद पर भरोसा हो गया कि वह अब किसी का कोई नुकसान नहीं करना चाहता।
पिछले 15 सालों से मैं लगातार ऐसे पुरुषों के साथ काम कर रही हूं जिन्होंने भयानक अपराध किए हैं। मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता के रुप में मैं यौन अपराधों से जुड़े हुए मनोविज्ञानिक उपचार कार्यक्रमों का आयोजन करती हूं।
मैं यौन अपराध उपचार कार्यक्रम के लिए प्रशिक्षिकों को प्रशिक्षण भी देती रही हूं।
कभी कभी लोग पूछते हैं, "ऐसे किसी अपराधी के साथ एक कमरे में बैठ कर भी आपको गुस्सा नहीं आता।" कहीं इसका ये मतलब तो नहीं कि आप उन्हें पसंद करती हैं?
मगर मैं जानती हूं कि उन पर गुस्सा उतारना बहुत आसान है। मगर मेरा नज़रिया है कि यदि मैं उस व्यक्ति को फिर से कोई अपराध करने से रोक पाऊं तो यह ज्यादा जरूरी होगा।
ताज़ा आंकड़े के अनुसार 18.5 फीसदी बाल यौन अपराधियों ने 12 महीने में बदलाव महसूस किए गए।
पुनर्वास
ये देखने में आया है कि यौन अपराधियों के लिए कुछ खास पुनर्वास कार्यक्रम और कुछ अच्छे उपचार कार्यक्रम आयोजित करने से उनकी मनोवृत्ति में खासा बदलाव आया।
हमारा समाज शराब और ड्रग्स जैसी कुछ और सामाजिक बुराइयों से तो लड़ने के लिए तैयार रहता है। इनसे पीड़ित लोगों को स्वीकार करता है और उनको सुधारने की कई कई योजनाएं भी बनाता है।
मगर हम यौन अपराध की मानसिकता वाले लोगों को सुधारने के बारे में संदेह से भरे होते है। हमें लगता है कि वे सुधरने वाले नहीं।
किसी भी पुनर्वास कार्यक्रम के सफल होने के लिए सार्वजनिक सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। दुर्दांत अपराधियों का पुलिस की विशेष व्यवस्था के तहत मनोवैज्ञानिक इलाज किया जाए।
उनके इलाज के दौरान उनको बार बार यह भी जताना होगा कि एक अच्छी जिंदगी की शुरुआत संभव है।
मैं जानती कि यह सब सुनने में बेहद अजीब लगता है।
और अजीब क्यों न लगे। मैं भी एक मां हूं। मेरे दो बच्चे हैं। अगर मेरे बच्चे के साथ कोई यौन संबंधी अपराध होता है तो मैं ज़रूर उबल पडूंगीं। उससे बदला लेने का ख्याल आएगा।
मगर व्यक्ति के बजाय एक समाज के ऱूप में यदि सोचा जाए तो हमें अलग तरीके से इस समस्या से निपटना होगा।
वे कोई दानव नहीं है। इसी समाज का हिस्सा हैं। उन्हें जेल के भीतर और समाज में ऐसे पेशेवर मददगारों की जरूरत है जो यौन अपराधियों के साथ बेहतर मानसिकता के साथ काम कर सकें। उन्हें एक ऐसे इंसान का दर्जा दें जिसमें अच्छाइयों के साथ साथ बुराइयों भी मौजूद हैं।