कैंसर रोगी में कीमोथेरेपी और रेडिएशन के चलते मां बनने की क्षमता खत्म हो जाती है, लेकिन अब ऐसी महिलाएं अपने अंडे या भ्रूण को फ्रीज करा सकती हैं। हालांकि कम उम्र की बच्चियों के लिए यह संभव नहीं होता है, लेकिन नई खोज के बाद कैंसर रोगी बच्चियों के अंडे भी सुरक्षित रखे जा सकेंगे। प्रयोगशाला में अंडों को विकसित करने के लिए नियंत्रित स्थितियों, जैसे ऑक्सीजन स्तर, हार्मोन, प्रोटीन की जरूरत होती है।
20 साल से लगते हैं अंडे बनने में
महिलाएं अविकसित अंडों के साथ जन्म लेती हैं। यह अंडाणु उनके गर्भाशय में मौजूद होते हैं, लेकिन युवा (प्यूबर्टी) होने पर ही विकसित होते हैं। कुछ अंडे किशोरावस्था में विकसित हो जाते हैं और कुछ को इसमें दो दशक से ज्यादा लगते हैं। अंडे को पूरी तरह विकसित होने के लिए अपनी आधी जैविक सामग्री खोनी होती है। वरना इसमें शुक्राणु से फर्टिलाइज होते वक्त ज्यादा डीएनए रह जाएगा। यह असामान्य फर्टिलिटी का कारण बनता है।