पोप ने कहा, “ हम अरबी भाषा बोलने वाले भी लोगों के लिए के लिए प्रार्थना करते हैं। ईश्वर आप सबको सलामत रखे।” वैटिकन के अधिकारियों का कहना है कि पोप ने अपने संबोधन में छठी भाषा का इस्तेमाल मध्य पूर्व में रह रहे ईसाइयों के प्रति अपने समर्थन जताने के लिए किया है।
वैटिकन ने कहा कि अरबी भाषा को इसलिए भी संबोधन में शामिल किया गया है ताकि सभी धर्मों के लोग इस क्षेत्र की शांति के लिए प्रार्थना करें। पोप के इस साप्ताहिक संबोधन को सुनने के लिए हर सप्ताह बहुत से देशों के लोग वैटिकन पहुंचते हैं। इस दौरान पहली बार एक पादरी ने पोप के संबोधन का सार अरबी भाषा में पढ़ा। इसके अलावा इस सार को फ्रांसीसी, अंग्रेजी, जर्मन, स्पैनिश, पुर्तगीज़, स्लोवाक, चेक, पोलिश, हंगेरियन और रूसी भाषाओं में भी पढ़ा गया।
'अच्छा विचार'
वैटिकन के अधिकारियों का कहना है कि दुनिया भर में रेडियो और टीवी पर लाइव प्रसारित होने वाले इस संबोधन में अरबी भाषा के प्रयोग से उम्मीद है कि मध्य पूर्व के अरब ईसाइयों में कुछ राहत का संदेश जाएगा। मध्यपूर्व में ही ईसाइयों के ज्यादातर धार्मिक स्थल हैं।
पाकिस्तानी मूल के एक ब्रितानी नागरिक ने कहा कि ये अच्छी पहल है। खालिद हुसैन ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, “हर कोई पोप का बहुत सम्मान करता है, भले ही वो किसी भी धर्म से हो या कोई भी भाषा बोलता हो। मैं सोचता हूं कि ये अच्छा विचार है।”
रोम में बीबीसी संवाददाता एलन जॉन्स्टन का कहना है कि सीरिया, इराक और फलीस्तीन जैसी जगहों पर ईसाइयों की मुश्किलें लगातार वैटिकन की चिंता बनी हुई है। वहां ईसाई समुदाय के लोग हिंसा और दमन से बचने या फिर बेहतर रोजगार और जिंदगी की तलाश में अपने घरों को छोड़ रहे हैं। बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस पयालन की वजह से मध्यपूर्व में प्राचीन ईसाइयों की संख्या घट रही है।