पोप फ्रांसिस ने पादरियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण के मामलों में 'सख्त कार्रवाई' की मांग की है।
उन्होंने वेटिकन में आध्यात्मिक मामलों के प्रमुख बिशप गेरहार्ड मुलर से कहा कि वो इस बात को सुनिश्चित करें कि यौन शोषण के अपराधियों को सजा दी जाए।
अर्जेंटीना के कार्डिनल रहे पोप फ्रांसिस का पादरियों पर लगे यौन शोषण के आरोपों पर ये पहला सार्वजनिक बयान है।
यौन उत्पीड़न झेल चुके लोगों के एक समूह ने पोप के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि 'बयान देने से बेहतर है उसे अमल में लाना'।
बच्चों की रक्षा
इससे पहले, पोप बेनेडिक्ट 16वें ने भी अपने निर्वाचन के बाद यौन शोषण की 'गंदगी' को चर्च से बाहर निकालने का वादा किया था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि उन्होंने इन घटनाओं पर पर्दा डालने का काम किया और वो बच्चों की रक्षा करने में नाकाम रहे।
पोप फ्रांसिस का निर्वाचन उस समय हुआ है जब चर्च यौन शोषण के आरोपों से जूझ रहा है।
शुक्रवार को अपने भाषण में पोप फ्रांसिस ने इस संकट का मुकाबला करते हए कहा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, आयरलैंड और यूरोप के मामलों के बाद चर्च की विश्वसनीयता को वापस हासिल करना महत्वपूर्ण है।
वेटिकन से जारी बयान के मुताबिक पोप ने बिशप मुलर से कहा कि वो यौन शोषण के मामलों में चिंतित हैं, नाबालिगों की रक्षा के लिए कदम उठाना ज़रुरी है। साथ ही अतीत में जिन्हें ऐसी हिंसा का सामना करना पड़ा है उन्हें मदद की ज़रुरत है और दोषियों का दंड मिलना चाहिए।