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'पोडियम गर्ल्स' हैं, या चुंबन लेने वाली सुंदरियां

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फ्रांस में इन दिनों साइक्लिंग की सबसे बड़ी रेस टुअर डि फ्रांस का आयोजन चल रहा है। एक महीने तक चलने वाली इस रेस के चैंपियन का फैसला 21 चरणों की प्रतियोगिता के बाद होता है।
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प्रत्येक चरण के चैंपियन को जीतने के बाद मंच पर खड़ा होना होता है। इस मंच या पोडियम की एक बड़ी ख़ासियत है।

पोडियम पर खड़े होने वाले चैंपियनों के स्वागत के लिए दोनों ओर खूबसूरत लड़कियों की ड्यूटी लगाई जाती है।

इनका काम चैंपियन साइक्लिस्ट को जर्सी देना होता है। इसके अलावा इन्हें चैंपियनों की गाल पर चुंबन भी लेना होता है।

इन्हें पोडियम गर्ल्स के तौर पर जाना जाता है।

कम उम्र की लड़कियां
हर साल पोडियम गर्ल्स के चुनाव के लिए सैकड़ों लड़कियां आवदेन करती हैं।

पहले तो पोडियम गर्ल्स का चुनाव उस शहर की लड़कियों से ही होता था जहां रेस की स्टेज पूरी होती थी और अमूमन ये लड़कियां तीस साल की उम्र तक की होती थीं।

लेकिन आजकल पोडियम गर्ल्स का चयन मॉडलिंग एजंसियों की लड़कियों के बीच से किया जा रहा है।

रेस की मुख्य आयोजक फ्रांसीसी बैंक, एलसीएल अब पोडियम गर्ल्स के लिए 20 साल की लड़कियों को तरजीह देने लगे हैं।

मागाली थियरी जीव विज्ञान में पीएचडी कर रही हैं और दूसरे साल पोडियम गर्ल के तौर पर काम करने के लिए चुनी गई हैं।

'सपने जैसा काम'
मागाली बताती हैं, “हर दिन काम करना सपने के सच होना जैसा है।”

वह बताती हैं कि काम का मुख्य हिस्सा जनसंपर्क, वीवीआईपी लोगों की देखभाल करना होता है।

थियरी कहती हैं ये परंपरा पुरानी हो चुकी हैं, लेकिन अब भी लोग इसे काफी पसंद करते हैं।

थियरी कहती हैं, “पोडियम गर्ल्स के चलते ही इस रेस में महिलाओं का जुड़ाव हो जाता है।”

पोडियम गर्ल्स विजेता साइक्लिस्टों को किस तो करती हैं लेकिन उन्हें इससे ज्यादा संपर्क बढ़ाने की इजाजत नहीं होती।

2003 में पोडियम गर्ल्स मेलाने सिमोनेयू को रेस के एक स्टेज के विजेता से नोट लेने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। ये बात दूसरी है कि उन दोनों ने आपस में शादी कर ली थी।

स्लोवाकियाई साइक्लिस्ट पीटर सागन ने इस साल इस बात के लिए माफ़ी मांगी है कि उन्होंने बीते साल टूअर डि फ्लांडर्स की समाप्ति पर पोडियम गर्ल्स के साथ अभद्र हरकत की थी।
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भेदभाव
हालांकि कई विश्लेषक ये भी मानते हैं कि पोडियम गर्ल्स की परंपरा बेहद पुरानी हो चुकी है।

साइक्लिंग न्यूज़ डॉट कॉम की डिप्टी एडिटर लाउरा वेस्लो कहती हैं, “21वीं शताब्दी की महिलाएं अब बस सुंदरता के लिए कामयाब लोगों के साथ खड़ी नहीं हो सकतीं।”

वेस्लो इसे महिलाओं के साथ बहुत बड़ा भेदभाव मानती हैं। वह कहती हैं, “साइक्लिंग की दुनिया में आपको महिलाओं की मौजूदगी तभी दिखती है जब पोडियम पर आपको मॉडल्स दिखाई देती हैं। यह खेल में पुरुष और महिलाओं के बीच असमानता को बढ़ावा देने वाला है।”
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