अनौपचारिक शिखर बैठक की कूटनीति के जरिए वैश्विक और महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मामलों पर नई समझ विकसित करने की पीएम नरेंद्र मोदी की दूसरी कोशिश आज रूस में परवान चढ़ेगी। विदेश मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यह अनौपचारिक शिखर बैठक वैश्विक कूटनीति में नए समीकरण की संभावना तैयार कर सकता है। खासतौर से यह ईरान पर प्रतिबंध के जरिए भारत को उलझन में डालने वाले अमेरिका केलिए भी इस बैठक में संदेश छिपा है।
दरअसल वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद नई सरकार ने अमेरिका से दोस्ती तो बढ़ाई, मगर परंपरागत मित्र रूस से भी संबंधों का संतुलन कायम रखा। पूर्व राजदूत जी पार्थसारथी के मुताबिक सीरिया की वर्तमान स्थिति, ईरान-अमेरिका परमाणु समझौता रद्द होने, अफगानिस्तान में शांति बहाली के प्रयास और जल्द होने वाले शंघाई सहयोग संगठन की बैठक से पूर्व मोदी-पुतिन की यह अनौपचारिक मुलाकात बेहद अहम साबित हो सकती है।
जाहिर तौर पर ऐसी बैठकों में सीधे तौर पर वैश्विक और द्विपक्षीय मामलों में दोनों पक्ष खुल कर अपना नजरिया साझा करते हैं। ऐसे में जाहिर तौर पर इस बैठक में आतंकवाद, ईरान, सीरिया, पाकिस्तान से जुड़े मामलों में गंभीर बातचीत होगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा अनौपचारिक शिखर बैठक में मोदी-पुतिन के बीच आर्थिक क्षेत्र में एक दूसरे के सहयोग से आगे बढने के तरीके पर बातचीत होगी। भारत बांग्लादेश में परमाणु प्लांट बना रहा है। माना जा रहा है कि रूस इसमें अपनी विशेषज्ञता संबंधी सेवा भारत को उपलब्ध कराएगा।
गौरतलब है कि बीते महीने ही पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक शिखर वार्ता कर दुनिया को चौंकाया था। अब पीएम मोदी पुतिन के साथ सोमवार को ऐसी ही वार्ता करेंगे। दो हफ्ते पूर्व ही राष्ट्रपति बने पुतिन और पीएम मोदी के बीच इस दौरान कई बार फोन पर भी बातचीत हुई है।