जापान के वैज्ञानिक तकाकी कजीता और कनाडा के अर्थर मैकडोनांड को संयुक्त रूप से भौतिकी विज्ञान का नोबेल पुरस्कार दिया जाएगा। इन दोनों को न्यूट्रीनोज की ‘गिरगिटनुमा’ प्रकृति के बारे में पता लगाने के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा। दोनों वैज्ञानिकों ने यह साबित किया है कि परमाणु के बेहद सूक्ष्म कण न्यूट्रीनोज में भार भी होता है।
द रॉयल स्विडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज ने कहा है कि इन दोनों वैज्ञानिकों ने यह साबित करने में यह भूमिका निभाई कि न्यूट्रिनोज अपनी पहचान बेहद तेजी से बदलते हैं। 56 वर्षीय कजीता टोक्यो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और इंस्टीट्यूट फॉर कॉस्मेटिक रे रिसर्च के निदेशक हैं जबकि 72 वर्षीय मैकडोनाल्ड कनाडा के क्वीन्स यूनिवर्सिटी ऑफ किंग्सटन में प्रोफेसर एमिरेट्स हैं। इन दोनों वैज्ञानिकों के बीच करीब 9.60 लाख अमेरिकी डॉलर की राशि बांटी जाएगी।
इन्हें 10 दिसंबर को पुरस्कार वितरण समारोह में एक-एक डिप्लोमा और एक-एक गोल्ड मेडल दिया जाएगा। दोनों वैज्ञानिकों ने जापान के सुपर कैमियोकांडे डिटेक्टर और कनाडा के सडबरी न्यूट्रीनो ऑबजर्वेट्री में काम करते हुए ये आविष्कार किए। वर्ष 1998 में कजीता ने दिखाया कि न्यूट्रीनोज को कैसे देखा जा सकता है। इसके तीन साल बाद मैकडोनाल्ड ने भी साबित किया कि कैसे सूर्य से आने वाले न्यूट्रीनोज अपना रंग बदलते हैं।
स्टॉकहोम में एक न्यूज कांफ्रेंस में टेलीफोन पर मैकडोनाल्ड ने कहा कि जब यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि सूर्य से धरती पर आने के दौरान न्यूट्रीनोज एक रूप से दूसरे में बदल जाते हैं तब उनके लिए वह अद्भुत क्षण है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक बेहद डरावना आविष्कार था। अभी वैज्ञानिकों को यह पता करना है कि न्यूट्रीनोज का वास्तविक भार क्या है।
क्या है न्यूट्रीनोज
न्यूट्रिनोज बेहद सूक्ष्म कण होते हैं जो सूर्य और तारों के साथ परमाणु संयंत्रों में परमाणु रिएक्शन के दौरान पैदा होते हैं। अकादमी ने कहा है कि वैज्ञानिकों की इस खोज से परमाणु के एक सबसे सूक्ष्म चीज के बारे में हमारी समझ बदल गई, जो ब्रह्मांड के बारे में हमारे विचार के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।