सरकार के विरोध में प्रदर्शन कर रहे ‘येलो वेस्ट’ प्रदर्शनकारियों का मुख्य नारा है, ‘मैक्रों इस्तीफा दो’। लोगों का गुस्सा अपने उस नेता के लिए है जिसे वे सिर्फ ‘अमीरों का नेता’ मानते हैं। उनका मानना है कि मैक्रों आम जनता से दूर हैं। दरअसल, मैक्रों ने व्यापार सुधार के लिए कदम उठाए हैं और उनका मानना है कि इसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को अधिक वैश्विक बनाना है। वहीं, फ्रांस के कर्मचारियों की राय इसके ठीक उलट है। वे इसे ‘बर्बर’ और ‘अधिकारों को कमजोर करने वाला’ मानते हैं। वहीं, राष्ट्रपति के कार्यालय ने कहा है कि वह शनिवार से पहले बातचीत नहीं करेंगे।
देश में ‘येलो वेस्ट’ प्रदर्शन से पहले करीब 300 लोगों को हिरासत में लिया गया है। फ्रांस के गृहमंत्री क्रिस्टोफर कास्टानेर ने कहा कि उन्हें केवल कुछ हजार लोगों के राजधानी में आने की उम्मीद थी। पिछले सप्ताहांत प्रदर्शनकारियों की संख्या आठ हजार थी। प्रधानमंत्री एडवर्ड फिलिप ने शुक्रवार शाम येलो वेस्ट प्रदर्शनकारियों के एक दल से मुलाकात की। उन्होंने लोगों से प्रदर्शनों में शामिल नहीं होने की अपील की है। बैठक के बाद अभियान के प्रवक्ता क्रिस्टोफर चालेनकॉन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमारी बात सुनी और राष्ट्रपति तक हमारी बात पहुंचाने का वादा किया है।