पैराडाइज पेपर्स के तौर पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर गुप्त फाइलें सामने आई हैं। उनमें से सबसे अहम फाइल एक ऑफशोर लॉ फर्म से जुड़ी हुई है, जो अमीर और चर्चित लोगों की टैक्स से जुड़ी गतिविधियों का ब्योरा देती है।
इस तरह के बड़े खुलासों की श्रृंखला में यह ताजा कड़ी है। हो सकता है आपको पैराडाइज पेपर्स से जुड़ी जानकारियों को समझने में दिक्कत हो रही हो। समस्या यह है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। यह मानते हुए कि इस तरह से लीक्स ज्यादा ही सामने आ चुके हैं, यह आकलन करना मुश्किल है कि गुप्त जानकारियों पर आधारित ऐसी पड़ताल का दुनिया द्वारा अपने टैक्स से जुड़े मामलों के नियमन पर क्या प्रभाव पड़ता है।
इस पर्दाफाश का निरीक्षण करने वाले इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के जेरार्ड राइल के मुताबिक, "बाहरी देशों में इस तरह के लीक का गहरा असर पड़ता है क्योंकि उन्हें पता नहीं होता कि अगला लीक कहां से होगा और किसकी जानकारी सामने आ जाएगी।" तो नजर डालते हैं पिछले चार सालों में हुए कुछ बड़े लीक की। शुरुआत सबसे बड़े पर्दाफाश से:
पनामा पेपर्स 2016
डेटा के आधार पर देखें तो यह सभी खुलासों का बाप है। अगर 2010 में विकीलीक्स द्वारा संवेदनशील डिप्लोमैटिक केबल्स को जारी करना आपको बहुत बड़ा मामला लगा था तो समझ लें कि पनामा पेपर्स में उससे 1500 गुना ज्यादा जानकारी थी।
विकीलीक्स का खुलासा तो कई दिशाओं में बंटा हुआ था मगर पनामा पेपर्स सिर्फ वित्तीय मामलों पर आधारित थे। यह तब हुआ जब 2015 में एक गुमनाम स्रोत ने जर्मन अखबार ज्यूड डॉयचे त्साइटुंग से संपर्क किया और पानामा की लॉ फर्म मोसाका फोंसेका के एनक्रिप्टेड डॉक्युमेंट्स दिए। यह लॉ फर्म गुमनाम विदेशी कंपनियों को बेचती है, जिससे मालिकों को अपने कारोबारी लेन-देन अलग रखने में मदद मिलती है।
यह डेटा इतना विशाल (2.6 टेराबाइट्स) था कि जर्मन अखबार ने इंटरेशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) से मदद मांगी। एक साल की स्क्रूटनी के बाद ICIJ और इसके सहयोगियों ने संयुक्त रूप से 3 अप्रैल 2016 को पनामा पेपर छापे। एक महीने बाद दस्तावेजों के डेटाबेस भी ऑनलाइन डाल दिया।
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किस-किस का नाम आया?
कुछ न्यूज पार्टनर्स ने इस बात पर फोकस रखा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के सहयोगियों ने कैसे पूरी दुनिया में कैश की हेरा-फेरी की। रूस में तो इसपर बहुत कुछ नहीं हुआ। मगर आइसलैंड और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मुश्किल में फंस गए।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पद छोड़ना पड़ा। कुल मिलाकर दर्जन भर मौजूदा और पूर्व विश्व नेताओं, 120 से ज्यादा राजनेताओं, अधिकारियों और असंख्य अरबपतियों, हस्तियों और खिलाड़ियों का पर्दाफाश हुआ।
डेटा किसने लीक किया?
जॉन डो ने। यह असली नाम नहीं है। अमेरिका में एक क्राइम सीरीज में गुमनाम विक्टिमों को यही नाम दिया जाता है। मगर मिस्टर या मिस डो की असल पहचान अब भी पता नहीं है।
पनामा पेपर के सामने आने के पांच महीनों बाद ICIJ ने बहामस कॉर्पोरेट रजिस्ट्री से कुछ खुलासे किए। 38जीबी डेटा से प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों, राजकुमारों और दोषी करार दिए गए अपराधियों की विदेश में गतिविधियों का पर्दाफाश किया गया। ईयू के पूर्व कंपिटीशन कमिश्नर नीली क्रोन्स ने माना कि एक विदेशी कंपनी में उनकी हिस्सेदारी को सार्वजनिक करने में उनसे 'चूक' हुई है।