ब्रिटेन में एक अदालत पैनल द्वारा कक्षाओं में लड़के और लड़कियों को अलग बैठाने की इस्लामी स्कूलों की नीतियों को गैरकानूनी करार दिया है। तीन जजों की पीठ ने बर्मिंघम स्थित अल हिजराह स्कूल की नीतियों को अवैध करार दिया है, जिसमें स्कूल ने कक्षा पांच से आगे सेक्स के आधार पर पुरुष और महिला छात्रों को अलग करने को अनिवार्य कर दिया था।
अदालत का कहना है कि यह ब्रिटेन के 2010 समानता के अधिनियम के खिलाफ है। अदालत का यह फैसला आने से ब्रिटेन में इस तरह की नीति रखने वाले सभी स्कूलों की विश्वसनीयता पर असर डालेगा। जस्टिस सर टेरेंस एथर्टन, लेडी जस्टिस ग्लोस्टर और लॉर्ड जस्टिस बीटसन ने ब्रिटेन स्कूल वाचडाग आफस्टेड की अर्जी पर सुनवाई करते हुए स्कूल के पक्ष में दिए गए हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया।
स्कूल की नीति के तहत कक्षा पांच के बाद लड़के और लड़कियों को अलग से पढ़ाया जा रहा था और स्कूल कॉरिडोर में दोनों को एक साथ टहलने की भी पाबंदी थी।