खूंखार इस्लामिक स्टेट आतंकवादी समूह विदेशी महिलाओं को सशक्त बनाने की गलत भावना से प्रलोभन दे रहा है। यह बात ब्रिटेन के एक थिंक टैंक की नयी रिपोर्ट में कही गई है।
रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस एंड सेक्युरिटी स्टडीज, आरयूएसआई द्वारा संकलित रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन कारणों ने सैकड़ों महिलाओं को यूरोप से आईएसआईएस के क्षेत्र में जाने को प्रेरित किया, वो जटिल हैं।
रिपोर्ट की सहलेखक एमिली विंटरबॉथम ने कहा, 'हमने उन महिलाओं से बातचीत की जिनका चरमपंथीकरण नहीं किया गया है, लेकिन समझ सकी कि क्यों इनमें से कुछ लड़कियां सीरिया और इराक गई होंगी ताकि 'अच्छे मुसलमान' की तरह रह सकें।' उन्होंने कहा कि सभी महिला आईएसआईएस सदस्यों को 'जिहादी ब्राइड' कहना सही नहीं है।
विंटरबॉथम ने 'द इंडिपेंडेंट' से कहा, 'आईएसआईएस महिला की वो छवि बेचने में सफल रहा है। यह सिर्फ नौसिखये जिहादी दुल्हन 'जिहादी ब्राइड' के बारे में नहीं है बल्कि महिला कह रही है, 'यह मेरे धर्म, मेरी राजनैतिक आस्था और जिस तरीके से मैं जीना चाहती हूं उसके अनुरूप है।'