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दुनिया की सबसे ताकतवर महिला मर्केल के सामने बड़ी चुनौती, कुर्सी पर मंडराया खतरा

Tue, 21 Nov 2017 05:42 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुखर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल की गठबंधन सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। 12 साल तक यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को थामे रहने वाली दुनिया की सबसे ताकतवर महिला के सामने अब अपनी सत्ता बचाए रखने की बड़ी चुनौती है।
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जर्मनी के उद्योग जगत द्वारा समर्थित फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी (एफडीपी) के अलग होने के कारण गठबंधन सरकार को लेकर चल रही उच्च स्तरीय बातचीत टूट गई है। इस कारण यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी फिलहाल राजनीतिक संकट में घिर गई है।

एफडीपी नेता क्रिश्चिन लिंडनेर ने कहा कि एंजेला के सीडीयू, सीएसयू और जलवायु समर्थक ग्रीन्स के कंजर्वेटिव गठबंधन के साथ सरकार बनाने के लिए भरोसे का कोई आधार नहीं है।
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उन्होंने यह भी कहा कि खराब ढंग से सरकार चलाने के बजाय अच्छा है कि शासन ही न किया जाए। जर्मनी की प्रमुख समाचार पत्रिका स्पीगल ऑनलाइन ने लिखा है कि चांसलर के रूप में 13वें साल में प्रवेश करने जा रही मर्केल को भले ही जर्मनी में प्रशंसा भरी नजरों से देखा जाता हो, लेकिन घर में उनका सम्मान घट गया है। गठबंधन सरकार पर बातचीत के बाधित होने का बड़ा कारण आव्रजन समेत कुछ मुद्दों पर एक राय का न बन पाना रहा। 

दरअसल, एंजेला की उदारवादी नीतियों के चलते 2015 से अब तक 10 लाख से अधिक शरणार्थी जर्मनी आ चुके हैं, जिससे नाराज मतदाताओं ने दक्षिणपंथी एएफडी का दामन थामा और हिटलर के बाद पहली बार जर्मनी में कट्टरपंथी पार्टी ने अपना वजूद बनाया।

मर्केल के सहयोगियों का मानना है कि उनकी नीतियों के चलते ही देश में उग्र दक्षिणपंथी एएफडी का उभार हुआ है। इसी कारण दूसरे दलों के साथ मर्केल की गठबंधन कोशिशें नाकाम हो गई।

अब जर्मनी भारी अनिश्चितता व राजनीतिक कश्मकश में है, जिसके चलते एंजेला मर्केल को पद भी छोड़ना पड़ सकता है। वह खुद भी अल्पसंख्यक सरकार चलाने के पक्ष में नहीं हैं, जबकि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी पहले ही एंजेला से गठजोड़ को इंकार कर चुकी है।
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कार्यकारी चांसलर बनी रहेंगी मर्केल

गठबंधन से बातचीत टूटने के बाद जर्मनी राजनीतिक संकट में घिर चुका है। आशंकाएं जताई जा रही हैं कि देश में एक बार फिर चुनाव हो सकते हैं।

उधर कारोबारियों की पसंदीदा फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी ने भी कई हफ्तों तक चली बातचीत के बाद खुद को गठबंधन की कोशिशों से बाहर कर लिया है। ऐसे में मर्केल ने कहा है कि वह कार्यकारी चांसलर बनी रहेंगी और राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर श्टाइनमायर से मिलकर तय करेंगी कि आगे कैसे बढ़ना है।

एसपीडी नेताओं के रुख पर नजरें
गठबंधन पर बातचीत टूटने से जर्मनी में चांसलर द्वारा अल्पमत सरकार बनाने या राष्ट्रपति द्वारा नये चुनाव के एलान पर लोगों की निगाह जरूर है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों को उम्मीद है कि इतनी जल्दी देश में दोबारा चुनाव नहीं होंगे और किसी तरह एसपीडी के साथ बात बनाने की कोशिश हो सकती है।

कुछ एसपीडी नेता सरकार में शामिल होने की बात भी कर रहे हैं। उधर, मर्केल के सहयोगी जेेन्स स्पान्ह ने कहा कि हमारे पास सक्षम कार्यवाहक सरकार है और जरूरी कामों में कोई रुकावट भी नहीं आएगी इसलिए घबराने की कोई बात नहीं है।
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