जर्मनी के शोधकर्ताओं का दावा है कि बर्फ में जम जाने के बाद एंड्रॉएड फोन से गोपनीय आंकड़ों को निकाला जा सकता है।
शोधकर्ताओं ने कुछ एंड्रॉएड फोनों को एक घंटे के लिए जमा दिया ताकि वो उस खुफिया कोड को जान सकें जो कि किसी फोन में आंकड़ों को छेड़-छाड़ से सुरक्षित रखता है।
इसके बाद इन्हें इन फोनों की कॉन्टैक्ट लिस्ट, ब्राउजिंग डीटेल और तस्वीरों तक पहुंचने में सफलता मिल गई।
एंड्रॉएड फोन में आंकड़ों को छेड़-छाड़ से रोकने वाला तंत्र उपभोक्ताओं के लिए तो अच्छा है लेकिन कानून को लागू करने वालों को इससे बड़ी दिक्कतें होती हैं।
इसका हल ढ़ूंढ़ने के लिए फ्रेडरिक अलेक्जेंडर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं- मुलर, माइकेल स्प्रीट्जेनबर्थ और फेलिक्स फ्रीलिंग ने एंड्रॉएड फोन को एक फ्रीजर में तब तक रखा जब तक कि उसका तापमान शून्य से दस डिग्री नीचे तक नहीं हो गया।
शोधकर्ताओं ने देखा कि फोन जम जाने के तुरंत बाद यदि उसकी बैटरी निकालकर और दोबारा लगाई गई तो फोन सेट बेहद संवेदनशील स्थिति में आ गया।
फ्रीजर ने बदल दी
दरअसल जमने के बाद जब फोन को दोबारा शुरू किया गया तो वो एंड्रॉएड के ऑपरेटिंग सिस्टम की बजाय वैज्ञानिकों द्वारा लगाए गए ऑपरेटिंग सिस्टम से काम करने लगा।
शोधकर्ताओं को इसमें से तमाम ऐसे आंकड़ों को निकालने में सफलता मिली जो कि आमतौर पर हैंडसेट में गोपनीय रहते हैं।
जमे हुए सॉफ्टवेयर ने आंकड़ों को कॉपी कर लिया और बाद इसे कंप्यूटर के जरिए पढ़ा गया। जमे हुए एंड्रॉएड फोन से हैकिंग के बारे में भी काफी जानकारी मिली।
शोधकर्ताओं में से एक और पीएचडी के छात्र टिलो मुलर ने बीबीसी को बताया कि इस प्रयोग से उन्हें आंकड़ों तक पहुंचने में मदद मिली जो कि आमतौर पर फोन की मेमॉरी में रहती है।
इन लोगों ने ये प्रयोग सैमसंग गैलेक्सी के मोबाइल सेटों पर भी किया और वहां भी उन्हें इसी तरह के परिणाम मिले। सैमसंग के ये मोबाइल सेट उनमें से हैं जिनमें इस तरह के सिस्टम का प्रयोग सबसे पहले किया गया था।