भारतीय मूल की महिला को फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के नाम पर कपड़े उतारने को कहा गया। महिला का आरोप है कि उसके साथ नस्लीय भेदभाव भी किया गया। श्रुति बासप्पा 29 मार्च को बंगलूरू से आइसलैंड जा रही थी।
उसी दौरान जर्मनी के फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर उसके साथ यह वाकया हुआ। इस घटना के सामने आने के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तत्परता दिखाते हुए वहां के संबंधित महावाणिज्य दूत रवीश कुमार से रिपोर्ट मांगी है।
आइसलैंड के रेकजाविक में रहने वाली श्रुति ने आइसलैंड के निवासी से ही शादी की है। उसने पूरे घटनाक्रम को अपनी फेसबुक पोस्ट में बयां किया है। उसने कहा कि वह अपने पति और 4 वर्षीय बेटी के साथ बंगलूरू से आइसलैंड जा रही थी। रास्ते में फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर उसे लाइन से आकस्मिक रूप से बाहर निकाल लिया गया और सुरक्षा जांच के लिए कमरे में आने को कहा। उस कमरे में उसे कपड़ा ऊपर उठाने या उतारने के लिए कहा गया ताकि अधिकारी ये जांच कर सकें कि कपड़े के नीचे वह कुछ छुपा कर तो नहीं ले जा रही है।
श्रुति बासप्पा ने कहा यह सब कुछ उसकी चार साल की बच्ची की आंखों के सामने हुआ। उसने कहा उसका कुछ समय पहले पेट की सर्जरी हुई थी इसलिए वह थपथपा कर उसकी जांच कर ले, लेकिन अधिकारी नहीं माने। उसने अपने पति को कमरे के अंदर बुलाने की जिद करने लगी।
श्रुति ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उसे तब बड़ा आश्चर्य हुआ जब उसके आइसलैंड निवासी पति अंदर आए तो उन्हें देखकर जांच अधिकारियों का बर्ताव और हाव भाव पूरी तरह बदल गया। उसके बाद पूरी घटना मामूली जांच बनकर रह गई। पेशे से आर्किटेक्ट श्रुति ने कहा यदि साथ में कोई यूरोपीय मित्र नहीं हो तो हम ‘ब्राउन’ हमेशा शक के घेरे में रहते हैं। उसने आरोप लगाया कि मुझे अक्सर भीड़ में से अनायास जांच के लिए निकाल लिया जाता है।